नगर निगम में रोजाना करीब 3000 लोगों का आना-जाना होता है। इनमें 500 से अधिक कर्मचारी व अधिकारी हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण रोकने के लिए थर्मल स्क्रीनिंग सिर्फ 500 से 600 लोग ही करा रहे हैं। बाकी बिना जांच के ही नगर निगम में आ जा रहे हैं। जांच न कराने वालों में कर्मचारी अधिकारी भी शामिल हैं।
ऐसे में यहां संक्रमण का खतरा बना हुआ है, क्योंकि नगर निगम कर्मचारी सीधे तौर पर कोरोना फाइटर्स के रूप में फील्ड में काम कर रहे हैं। कोरोना काल में खुले सभी कार्यालयों में आने वाले कर्मचारियों व अन्य लोगों की थर्मल जांच स्क्रीनिंग व सैनिटाइजेशन के स्पष्ट निर्देश हैं, लेकिन नगर निगम में जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। कार्यालय आने वाले करीब 25 से 30 प्रतिशत लोग ही जांच करा रहे हैं। सख्ती न होने के कारण न कर्मचारी जांच करा रहे हैं और न पार्षद और ठेकेदार। इसी तरह अन्य लोग भी बिना जांच ही आ जा रहे हैं।
संक्रमण रोकना सबकी जिम्मेदारी
यदि कोई लापरवाही कर रहा है तो यह ठीक नहीं है। संक्रमण रोकना सबकी जिम्मेदारी है, इसलिए सबको सहयोग करना चाहिए। अब फिर से कड़े निर्देश जारी किए जाएंगे।
- इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त