जेल में अब किसी अपराधी के पास कोई प्रतिबंधित वस्तु बरामद होती है तो उस पर 200 रुपये के स्थान पर अब 25 हजार रुपये यानी सवा सौ गुना अधिक जुर्माना लगेगा और तीन साल की अतिरिक्त सजा भी काटनी होगी।
सरकार सवा सौ साल बाद प्रिजन एक्ट 1894 की धारा 42 और 43 में संशोधन करने जा रही है। इस एक्ट के तहत पहले छह माह की सजा या अधिकतम 200 रुपये जुर्माना था। जिसे बढ़ाकर तीन साल की सजा और 25 हजार रुपये जुर्माना करने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है ।
इस संबंध में डीजी कारागार आनंद कुमार के प्रस्ताव पर कारागार प्रशासन ने न्याय विभाग से परामर्श लेने के बाद अपनी सहमति दे दी है। अब जल्द ही कैबिनेट में लाकर इसे अमली जामा पहनाया जाएगा।