लखनऊ। खेती के साथ अतिरिक्त आय बढ़ाने की तलाश कर रहे किसानों के लिए मोती की खेती कमाई का नया जरिया बनकर उभर रही है। महज 18 महीने में करीब 8.50 लाख रुपये की संभावित आय के मॉडल ने किसानों का ध्यान खींचा। कृषि विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जूपिटर हाल में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला में 1175 किसानों को इसकी जानकारी दी गई।
सेवानिवृत्त अपर कृषि निदेशक आनंद त्रिपाठी ने जैविक खेती से जुड़े किसानों को बताया कि मोती की खेती छोटे तालाब में भी की जा सकती है। कंपनी की ओर से 62 रुपये प्रति सीप की दर से सीप उपलब्ध कराई जाती है। तालाब में सीप डालने, उनके रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं का काम भी कंपनी करती है। करीब 18 माह बाद कंपनी एक सीप को 200 रुपये में खरीदती है।
उन्होंने बताया कि दो हजार वर्ग फीट के तालाब में 10 हजार सीप डाली जा सकती हैं। इस पर करीब 7.50 लाख रुपये का खर्च आता है। यदि 10 हजार में से आठ हजार सीप भी सुरक्षित बचती हैं तो उनकी कीमत 16 लाख रुपये होगी। इस प्रकार किसान को 18 महीने में करीब 8.50 लाख रुपये की आय हो सकती है। किसान को केवल तालाब, बोरिंग आदि की व्यवस्था करनी होती है, जबकि अन्य कार्य कंपनी के लोग करते हैं।
कार्यशाला में किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं की भी जानकारी दी गई। लखनऊ कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. ए.के. दुबे, केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके शुक्ला, अहमदाबाद से आए चिंतन दवे व उप निदेशक कृषि विनय कौशल और जिला कृषि अधिकारी डॉ. मेनका ने विचार रखे। कार्यक्रम में लघु सिंचाई, भूमि संरक्षण और राष्ट्रीय आजीविका मिशन समेत विभिन्न विभागों के स्टॉल भी लगाए गए। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यशाला में मोहनलालगंज विधायक अमरेश रावत, भाजपा नेता नीरज सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्य, मेरठ के एमएलसी अश्वनी त्यागी व लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
पशुपालकों ने ली जानकारी
स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव-2026 के दूसरे दिन हाइड्रोपोनिक तकनीक से चारा उत्पादन से संबंधित स्टॉल पर सबसे अधिक भीड़ रही। पशुपालकों ने कम लागत और कम समय में हरा चारा उगाने की तकनीक तथा एआई एप की मदद से उसकी निगरानी की जानकारी हासिल की। कंपनी के सीनियर जनरल मैनेजर मार्केटिंग इंद्रजीत सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी बकरी रिसर्च अनुसंधान और मक्का रिसर्च अनुसंधान के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि हाइड्रोपोनिक विधि से सिर्फ आठ दिन में हरा अंकुरित चारा तैयार किया जा सकता है। पशुपालक मोबाइल में इंस्टॉल एआई एप के जरिये प्रत्येक ट्रे की तस्वीर भेजकर चारे की गुणवत्ता और बढ़वार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। एक किलो मक्का से करीब पांच किलो चारा तैयार होता है।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जूपिटर हाल में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जूपिटर हाल में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जूपिटर हाल में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जूपिटर हाल में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जूपिटर हाल में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जूपिटर हाल में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जूपिटर हाल में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला