सरकारी सेवा के दांव-पेंच कितने चोट पहुंचाने वाले साबित हो सकते हैं, इसकी बानगी है 1992 बैच के प्रमोटी पीसीएस अफसरों की कहानी। इनको अपने से कनिष्ठ अफसरों से वरिष्ठता के लाभ के लिए लगातार सात साल तक लड़ाई लड़नी पड़ी। अब जब शासन ने इनके पक्ष में फैसला सुनाया है, हक की लड़ाई लड़ रहे 24 में से 19 अधिकारी रिटायर हो चुके हैं।
शासन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक इन अफसरों को सीधी भर्ती के अधिकारियों वेदपति मिश्रा व राधेश्याम मिश्र से वरिष्ठता देते हुए काल्पनिक वरिष्ठता व 8700 ग्रेड पे का विशेष वेतनमान दे दिया गया है। इन्हें काल्पनिक पदोन्नति तथा काल्पनिक पदोन्नति से वास्तविक पदोन्नति केबीच का एरियर भी मिलेगा।
इन अधिकारियों को मिला 8700 ग्रेड पे
अवधेश प्रताप सिंह, प्रेम शंकर, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, रणधीर सिंह चाहर, राम लखन प्रजापति, राजेंद्र प्रसाद शुक्ला, उदय नारायण सिंह,
प्रकाश चंद्र तिवारी, विद्या प्रकाश श्रीवास्तव, उदय शंकर उपाध्याय, श्रीकांत त्रिपाठी, ओंकार प्रसाद द्विवेदी, अनिल कुमार पांडेय, मो. ताहिर, महक सिंह, ओम प्रकाश पाठक, राम दवर यादव व राम सूरत, देवेंद्र सिंह पाठक।
इसके साथ ही, मुन्नी लाल पांडेय-संयुक्त निदेशक युवा कल्याण महानिदेशालय, चंद्र प्रकाश नारायण उपाध्याय-अपर आयुक्त लखनऊ मंडल, प्रवीण कुमार अग्रवाल-अपर आयुक्त आगरा मंडल, प्रभात कुमार शर्मा-अपर आयुक्त बरेली मंडल, शिव भूषण तिवारी-संभागीय खाद्य नियंत्रक भी शामिल हैं।