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प्रमोशन का फायदा तब मिला जब रिटायर हो गए 19 अफसर

Sun, 31 Jan 2016 12:02 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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सरकारी सेवा के दांव-पेंच कितने चोट पहुंचाने वाले साबित हो सकते हैं, इसकी बानगी है 1992 बैच के प्रमोटी पीसीएस अफसरों की कहानी। इनको अपने से कनिष्ठ अफसरों से वरिष्ठता के लाभ के लिए लगातार सात साल तक लड़ाई लड़नी पड़ी। अब जब शासन ने इनके पक्ष में फैसला सुनाया है, हक की लड़ाई लड़ रहे 24 में से 19 अधिकारी रिटायर हो चुके हैं।
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शासन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक इन अफसरों को सीधी भर्ती के अधिकारियों वेदपति मिश्रा व राधेश्याम मिश्र से वरिष्ठता देते हुए काल्पनिक वरिष्ठता व 8700 ग्रेड पे का विशेष वेतनमान दे दिया गया है। इन्हें काल्पनिक पदोन्नति तथा काल्पनिक पदोन्नति से वास्तविक पदोन्नति केबीच का एरियर भी मिलेगा।  

इन अधिकारियों को मिला 8700 ग्रेड पे
अवधेश प्रताप सिंह, प्रेम शंकर, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, रणधीर सिंह चाहर, राम लखन प्रजापति, राजेंद्र प्रसाद शुक्ला, उदय नारायण सिंह,

प्रकाश चंद्र तिवारी, विद्या प्रकाश श्रीवास्तव, उदय शंकर उपाध्याय, श्रीकांत त्रिपाठी, ओंकार प्रसाद द्विवेदी, अनिल कुमार पांडेय, मो. ताहिर, महक सिंह, ओम प्रकाश पाठक, राम दवर यादव व राम सूरत, देवेंद्र सिंह पाठक।
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इसके साथ ही, मुन्नी लाल पांडेय-संयुक्त निदेशक युवा कल्याण महानिदेशालय,  चंद्र प्रकाश नारायण उपाध्याय-अपर आयुक्त लखनऊ मंडल, प्रवीण कुमार अग्रवाल-अपर आयुक्त आगरा मंडल, प्रभात कुमार शर्मा-अपर आयुक्त बरेली मंडल, शिव भूषण तिवारी-संभागीय खाद्य नियंत्रक भी शामिल हैं।

ये था पूरा मामला

जानकार बताते हैं कि शासन ने 1999 में पीसीएस अधिकारियों की वरिष्ठता सूची बनाई थी। इसमें 92 बैच में सभी पदोन्नति से पीसीएस सेवा में आए अधिकारी शामिल थे। सीधी भर्ती का कोई अधिकारी नहीं था।

93 बैच में सीधी भर्ती व पदोन्नति, दोनों ही सेवा से जुड़े अधिकारी थे। मगर, 2003 में जो वरिष्ठता सूची बनी इसमें 93 बैच के सीधी भर्ती के अफसरों को 92 बैच दे दिया गया व उन्हें पदोन्नति वाले पीसीएस अधिकारियों से वरिष्ठ बना दिया गया।

इसका तभी से विरोध शुरू हो गया। 92 बैच के पदोन्नति वाले पीसीएस अधिकारी इसे अन्याय मानते हुए हाईकोर्ट चले गए, लेकिन इसी बीच 2009 में पीसीएस अफसरों को 8700 ग्रेड पे का विशेष वेतनमान देने का समय आ गया। इसके लिए पीसीएस में 16 साल की सेवा अनिवार्य थी।

उस समय 92 बैच में शामिल प्रमोटी पीसीएस अधिकारियों की सेवा साढ़े 16 साल हो चुकी थी जबकि सीधी भर्ती के अफसर, जिन्हें प्रमोटी अफसरों से वरिष्ठ बना दिया गया था, साढ़े 15 साल ही पूरा हुआ था।

मगर, नियुक्ति विभाग के तत्कालीन अधिकारियों ने सीधी भर्ती के इन अधिकारियों को प्रमोटी अधिकारियों से पहले पदोन्नति देने के लिए 16 साल की सेवा की शर्त में ढील दे दी व इसे 14 साल कर दिया।

इससे सीधी भर्ती के कनिष्ठ से वरिष्ठ बनाए गए पीसीएस अधिकारी पदोन्नत हो गए। जबकि, वास्तविक रूप से वरिष्ठ 24 प्रमोटी पीसीएस अधिकारी देखते ही रह गए। वहीं सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी ओपी पाठक ने कहा कि इस फैसले से हम लोगों को बहुत राहत मिली है।
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पिछले साल कागज में, अब वास्तविक लाभ मिला

अधिकारी बताते हैं कि इस मामले में दाखिल एक याचिका में हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव कार्मिक एवं नियुक्ति को दोनों ही पक्षों को सुनकर निर्णय के लिए निर्देशित किया था।

2014 में मौजूदा प्रमुख सचिव राजीव कुमार ने दोनों पक्षों की बात सुनकर विभाग की गलती सुधारने की कार्रवाई शुरू कराई। इन प्रमोटी अधिकारियों को पहली जीत तब मिली जब नए सिरे से बनाई गई 2015 की वरिष्ठता सूची में इन्हें सीधी भर्ती के अफसरों से वरिष्ठता दे दी गई।

अब विशेष सचिव नियुक्ति संजय यादव ने इन 24 प्रमोटी पीसीएस अधिकारियों को सीधी भर्ती के अपने बैच के अधिकारियों से 24 जनवरी 2009 से ही काल्पनिक रूप से वरिष्ठ मानते हुए 8700 ग्रेड पे का विशेष वेतनमान देने का आदेश जारी कर दिया है।

सीधी भर्ती के अधिकारियों को शासन ने इसी दिन 8700 ग्रेड पे का विशेष वेतनमान दिया था। इसके अलावा, इनको काल्पनिक पदोन्नति व वास्तविक पदोन्नति की तिथि के बीच का एरियर भी देने का आदेश जारी कर दिया है। ये अधिकारी वास्तविकता में अगस्त 2012 में पदोन्नत हुए थे।
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