लखनऊ। केजीएमयू में सेंट्रल पेशेंट मैनेजमेंट सिस्टम (सीपीएमएस) के प्रोजेक्ट की भुगतान संबंधी पत्रावलियां गायब हो गई हैं। प्रोजेक्ट के संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगने पर इसका खुलासा हुआ है। मामले में पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एक प्रोफेसर की बर्खास्तगी तक हो चुकी है।
केजीएमयू में मरीजों को ऑनलाइन ओपीडी पर्चा बनवाने, जांच रिपोर्ट, भर्ती और डिस्चार्ज समेत सभी काम ऑनलाइन करने की सुविधा वर्ष 2010 से शुरू की गई थी। इसके लिए केजीएमयू को किस्तों में भुगतान करना था। हालांकि, व्यवस्था शुरू होने के बाद इस पर विवाद शुरू हो गया।
मामले की जांच के बाद एक डॉक्टर को गड़बड़ी के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया। यह मामला इस समय कोर्ट में है। इसके बाद आरटीआई के तहत प्रोजेक्ट से संबंधित सूचना मांगने का सिलसिला शुरू हुआ। वर्ष 2022 में आरटीआई के बाद जब पत्रावलियों की जांच की गई तो कई फाइलें गायब मिलीं। आरटीआई से संबंधित सूचना न देने पर मामला राज्य सूचना आयोग के पास पहुंचा तो केजीएमयू ने शपथ पत्र देकर पत्रावलियां न होने की जानकारी दी। इसमें कहा गया है कि वर्ष 2018 से सीपीएमएस भुगतान से जुड़ीं कई फाइलों का पता नहीं चल रहा है। इनकी खोजबीन की जा रही है।
खोजी जा रही हैं फाइलें
केजीएमयू की कुलसचिव रेखा एस चौहान ने कहा कि सेंट्रल पेशेंट मैनेजमेंट सिस्टम का मामला काफी पुराना है। वित्त नियंत्रक कार्यालय में ये फाइल नहीं मिल सकी हैं। इनकी खोज की जा रही है।