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Lucknow News: पौष पूर्णिमा आज, नदियों में स्नान से मिलता है पुण्य

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लखनऊ। पौष माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को चंद्रदेव अपनी संपूर्ण सोलह कलाओं के साथ आकाश में विराजमान रहते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा और जरूरतमंदों को दान करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। ज्योतिष के अनुसार, अन्न-वस्त्र और तिल के दान से पितरों को तृप्ति मिलती है।
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ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि पौष माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ दो जनवरी को शाम के समय 6:54 मिनट से हो गया। इसकी समाप्ति तीन जनवरी, शनिवार को शाम 5:35 बजे पर होगी। ऐसे में पूर्णिमा का स्नान तीन जनवरी को किया किया जाएगा। पौष पूर्णिमा से ही माघ मास के पवित्र स्नान की शुरुआत हो जाती है। माघ मेला तीर्थराज प्रयागराज में 3 जनवरी से शुरू हो रहा है जो 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलेगा। संगम स्नान का महत्व पाप से मुक्ति, अक्षय पुण्य और मोक्ष प्राप्ति है। मुख्य स्नान की तिथियां मौनी अमावस्या (18 जनवरी), मकर संक्रांति (14 जनवरी), वसंत पंचमी (23 जनवरी) और माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) हैं, जिनमें मौनी अमावस्या सबसे प्रमुख है।

माघ मेले में स्नान का आध्यात्मिक महत्व
माघ मास में संगम स्नान को हजारों यज्ञों के बराबर फलदायी माना गया है। यह आत्मा को शुद्ध करता है। पापों से मुक्ति होती है, मानसिक तनाव से भी मुक्ति होती है। स्नान और दान से शनि, राहु-केतु जैसे ग्रहों के दोष शांत होते हैं। स्नान-दान और पूजा पाठ के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त को माना जाता है। माघ मेले में अन्न, वस्त्र (गर्म कपड़े, कंबल), तिल, और बिस्तर (रजाई, गद्दा, चारपाई) का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे पितरों की तृप्ति के साथ ही धन-धान्य, सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
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