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सरकारी अस्पतालों में फिर गहराया दवाओं का संकट

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मधुमेह से लेकर दिल की दवाओं तक का संकट
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सरकारी अस्पताल में त्वचा से लेकर मिर्गी तक की नहीं मिल रहीं दवाएं
राजधानी के सरकारी अस्पतालों में मधुमेह से लेकर दिल की दवाओं तक का संकट बना हुआ है। मरीजों को निजी दवा दुकानों से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। आरोप है कि ड्रग कॉर्पोरेशन दवाओं की आपूर्ति नहीं कर पा रहा है।
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शासन ने करोड़ों रुपये का दवाओं का बजट अस्पताल को देने के बजाय ड्रग कॉर्पोरेशन को इस वित्तीय वर्ष में दिया था। ड्रग कॉर्पोरेशन को अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति करनी थी। आरोप है ड्रग कारपोरेशन मांग के अनुरूप दवाओं की आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। इससे अस्पतालों में हर दूसरे-तीसरे माह दवाओं का संकट गहरा रहा है। मरीजों को सामान्य दवाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। सबसे अधिक दिक्कत त्वाचा रोग की दवाओं का है। इसमें सिर्फ एक ही एंटी फंगल ट्यूब की सप्लाई अब तक हुई है। इससे पहले करीब आठ एंटी फंगल ट्यूब की आपूर्र्ति अस्पतालों में होती थी। इसी तरह हार्ट, डायबिटिज, मानसिक रोग की दवाओं का संकट बना हुआ है। यहां तक कि कई जीवनरक्षक दवाएं भी अस्पताल से गायब हैं।
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अस्पताल से खरीदकर दे रहे दवा
ड्रग कॉर्पोरेशन से जो दवाएं अभी नहीं मिल रही हैं, वह अस्पताल स्तर से खरीदकर मरीजों को मुहैया कराई जा रही हैं।
- डॉ. राजीव लोचन, निदेशक, बलरामपुर
जन औषधि केंद्र से खरीद रहे दवाएं
कुछ दवाओं का संकट है। जो दवाएं नहीं मिल रही हैं, मरीज उन्हें जन औषधि केंद्र से खरीद रहे हैं।
- डॉ. डीएस नेगी, निदेशक, सिविल व लोहिया अस्पताल
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इन दवाओं की किल्लत
मधुमेह : इंसुलिन, मेटफार्मिन, ग्लिमीपिराइड
हार्ट की दवा : हिपेरिन, नाइट्रोकॉन्टिन
बेचैनी : जॉलफ्रे श
ब्लड प्रेशर : लोसारटन
मानसिक रोग की दवाएं- पैरॉक्सीटिन, सरट्रैलिन, मिर्गी के दौरे की दवा
बच्चों के कई सिरप नहीं
सिट्रिजिन सिरप
बीटाडीन, सोफ्रामाइसिन
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