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जून में घटी मरीजों के ठीक होने की रफ्तार, चिकित्सा विशेषज्ञों की ये है राय

Sat, 13 Jun 2020 12:51 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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जून शुरू होते ही  लखनऊ में कोरोना मरीज तेजी से बढ़े हैं, वहीं इनके ठीक होने की दर में गिरावट आई है। चिकित्सा विशेषज्ञ इसकी अलग-अलग वजह बता रहे हैं। शुरुआती दौर में मरीज मिलने की संख्या रोजाना दो से चार थी तो इनके ठीक होने की दर भी इसी अनुपात में चल रही थी। 
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11 मार्च को पहली मरीज मिली थी। पूरे महीने में 12 मरीज मिले और दो डिस्चार्ज हुए। 16 अप्रैल को पहला लॉकडाउन खत्म हुआ, उस दिन तक 112 मरीज थे। इस दिन तक आठ मरीज डिस्चार्ज हुए थे और एक की मौत हुई थी। दूसरा लॉकडाउन 17 अप्रैल से 3 मई तक चला।

17 अप्रैल से 30 अप्रैल तक देखें तो मरीजों की संख्या 222 हो गई और इस दिन तक 62 मरीज डिस्चार्ज हो गए थे। एक मई को कुल मरीज 229 थे, इस दिन तक एक मरीज की मौत हो गई थी और 69 डिस्चार्ज हो गए थे। कैसरबाग, लालबाग के आस-पास मरीज बढ़ने शुरू हुए तो 14 मई तक आंकड़ा 287 हो गया, लेकिन ठीक होने की गति बनी रही।
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नतीजतन सिर्फ 59 मरीज भर्ती थे। 24 मई को आंकड़ा 384 पहुंच गया। अस्पताल में 61 मरीज भर्ती थे। 31 मई को संख्या 412 पहुंच गई, लेकिन भर्ती मरीज 71 थे।  रही। सात जून को मरीजों का आंकड़ा 485 और भर्ती की संख्या 131 रही। 11 जून को मरीजों का आंकड़ा 554 पहुंच गया और भर्ती मरीजों की संख्या 143 रही। इस तरह देखें तो जून में मरीज के साथ भर्ती होने वालों का ग्राफ  बढ़ता जा रहा है। 
 

यहां देखें- मरीजों का ग्राफ

 तिथि      सैंपल    मिले    डिस्चार्ज
                       मरीज    मरीज
1 जून     291     17         2
2 जून    243        2         6
3 जून    296      13        2
4 जून    237      10        6
5 जून    148      16        8
6 जून    236      14      10

तिथि    सैंपल    मिले    डिस्चार्ज
                    मरीज    मरीज
 7 जून    195       8       1
8 जून     279     18       0
9 जून     202     12     10
10 जून   250     22     25
11 जू    331      17       8
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8 से 11 जून के बीच 36 मरीज हुए डिस्चार्ज

डिस्चार्ज मरीज
1 से 14 मई के बीच 142
15 से 24 मई के बीच 53
25 से 31 मई के बीच 32
1 से सात जून के बीच 30
8 से 11 जून के बीच 36

लॉकडाउन खत्म होने के बाद आवागमन बढ़ गया है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने और भीड़ बढ़ने से मरीजों की संख्या बढ़ी है। जब ज्यादा गंभीर मरीज सामने आते हैं तो उनके ठीक होने में वक्त बढ़ जाता है। इन दिनों भर्ती होने वाले ज्यादातर गंभीर मरीज हैं।  - डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ

रिकवरी को एक पैटर्न में नहीं बांधा जा सकता है। डायबिटीज, लिवर, किडनी, कैंसर के मरीजों की रिकवरी दर कम होती है। ज्यादातर अस्पतालों में भर्ती मरीज 50 साल के अधिक उम्र वाले हैं। यह भी रिकवरी दर गिरने का कारण है।  - डॉ. विक्रम सिंह, विभागाध्यक्ष, मेडिसिन लोहिया संस्थान 
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