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केजीएमयू में वेटिंग, अस्पताल में खाली पड़े

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ट्रॉमा से बलरामपुर तक दौड़ाते रहे, नहीं दिया वेंटिलेटर सपोर्ट
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केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में वेंटिलेटर के इंतजार में मरीज को 12 घंटे कैजुअलिटी में लिटाए रखने बाद मंगलवार दोपहर बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी भेज दिया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत बताई और दोबारा केजीएमयू रेफर कर दिया। इससे मरीज की जान बचाने के लिए तीमारदारों को मजबूरी में अलीगंज स्थित निजी अस्पताल की शरण लेनी पड़ी। वहां मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर है।
बाराबंकी पलिया मसूदपुर का रहने वाला अजूबा (18) सोमवार शाम सड़क हादसे में जख्मी हो गया था। तीमारदार उसे लेकर जिला अस्पताल गए, जहां से उसे रात में ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। रात करीब 11 बजे पिता लतीफ ट्रॉमा लाए। यहां डॉक्टर पूरी रात जांच के नाम पर दौड़ाते रहे। मरीज एंबुबैैग पर था। मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे मरीज को वेंटिलेटर खाली न होने का हवाला देकर बलरामपुर अस्पताल भेज दिया गया।
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वहां इमरजेंसी में मरीज को भर्ती करके वार्ड में शिफ्ट कराया गया। मरीज की हालत गंभीर होता देख डॉक्टर ने वेंटिलेटर की जरूरत बताई। पिता लतीफ का कहना है कि एसएसबी ब्लॉक में बने आईसीयू में जाकर पता किया तो वेंटिलेटर खाली थे, लेकिन डॉक्टर बिना निदेशक की अनुमति इसे देने को राजी नहीं थे। मरीज की हालत गंभीर होने पर बलरामपुर अस्पताल से मरीज को फिर ट्रॉमा रेफर कर दिया गया। इससे परेशान तीमारदार उसे अलीगंज के निजी अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया। इस बारे में ट्रॉमा प्रवक्ता संदीप तिवारी का कहना है कि वेंटिलेटर खाली होने पर प्राथमिकता से मरीजों को मुहैया कराया जाता है।
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