लखनऊ। नए साल पर एक साथ बड़ी संख्या में वाहनों के निकलने से शहर में शोर और धुएं का दबाव बढ़ गया। हवा में डीजल और पेट्रोल की महक घुल गई। आंखों में जलन के साथ राहगीरों का दम फूलने लगा। देखते ही देखते हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगी।
हैरानी की बात यह है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के आंकड़ों में हालात संतोषजनक बताए जा रहे हैं। देर शाम तक जहरीले धुएं के कारण लोगों की आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायतें सामने आईं। अलीगंज, लालबाग और तालकटोरा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) ऑरेंज श्रेणी में पहुंच गया।
रुक नहीं रही आंकड़ों की बाजीगरी
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों में ज्यादातर जगहों की हवा दुरुस्त बताई गई। गोमतीनगर और कुकरैल की हवा को हरे श्रेणी में बताया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आंकड़ों पर नियंत्रण किया जा रहा है। वास्तविक एक्यूआई सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। लोगों ने शहर के अधिक से अधिक इलाकों में नए और सटीक एक्यूआई मॉनिटरिंग सेंटर लगाए जाने की मांग दोहराई। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्या का कहना है कि वायु गुणवत्ता मापक मशीनों के आंकड़े सही हैं। गोमतीनगर की हवा के हरे श्रेणी में होने की बात है तो यह पिछले 24 घंटे का औसत आंकड़ा है।
उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े
गोमतीनगर- 96 - हरा- अच्छा
कुकरैल- 82- हरा - अच्छा
बीबीएयू- 107- पीला- औसत
लालबाग- 240- ऑरेंज- खराब
तालकटोरा- 237- ऑरेंज- खराब
अलीगंज -208 ऑरेंज- खराब