अगर आप आवासीय व व्यावसायिक अपार्टमेंट में रहते हैं और आपकी गाड़ियां रातभर सड़कों पर खड़ी होती हैं तो अब आपको पार्किंग शुल्क अदा करना होगा।
बस आपको तय करना है कि यह भुगतान आप मासिक करेंगे या वार्षिक। यही नहीं, पार्किंग स्थलों के अलावा किसी भी सड़क, पटरी, फुटपाथ या सार्वजनिक स्थान पर वाहन खड़े नहीं किए जा सकेंगे।
राज्य सरकार ऐसी व्यवस्था करने जा रही है। इसके लिए प्रदेश की पहली पार्किंग नीति का मसौदा तैयार कर लिया गया है।
इसे उत्तर प्रदेश नगर निगम (पार्किंग स्थलों का निर्माण, संधारण और संचालन) नियमावली- 2013 का नाम दिया गया है। इसे शीघ्र ही कैबिनेट से पास कराने की तैयारी है। यह नियमावली केवल नगर निगमों में ही प्रभावी होगी।
प्रदेश के प्रमुख शहरों की सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की है। लोग बड़े-बड़े घर तो बनवा लेते हैं लेकिन पार्किंग की व्यवस्था नहीं करते। इसी तरह आवासीय व व्यावसायिक अपार्टमेंट के पार्किंग स्थलों को बेच दिया जाता है।
इसके चलते लोगों को सड़कों पर गाड़ियां पार्क करनी पड़ती हैं। पार्किंग के लिए पर्याप्त स्थल न होने की वजह से नगर निगम और विकास प्राधिकरण सड़कों के किनारे पार्किंग का ठेका उठा देते हैं।
इसके चलते सड़कों पर जाम की स्थिति बन जाती है। इसलिए राज्य सरकार ने पार्किंग नीति तैयार की है। इसका मकसद पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाना और नगर निगमों की आय बढ़ाना है।
नीति के मुताबिक नगर निगम पार्किंग स्थल चिह्नित करेंगे। मौजूदा पार्किंग स्थलों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। नए मल्टीलेवल पार्किंग बनाने के साथ ही पुराने में गाड़ियां खड़ी करने की क्षमता बढ़ाई जाएगी।
वैकल्पिक स्थानों में फ्लाईओवर के नीचे, ग्रीन बेल्ट, बाजारों, मेलों और खाली मैदानों में जरूरत के आधार पर पार्किंग के ठेके उठाए जाएंगे।
आवासीय, व्यावसायिक व संस्थागत भवनों के बेसमेंट में पार्किंग की व्यवस्था कराई जाएगी। निजी क्षेत्र के सहयोग से भी पार्किंग स्थल विकसित किए जाएंगे।
नगर निगम से लेनी होगी अनुमति
रेलवे स्टेशन के बाहर, बस स्टेशन, स्कूल, कॉलेजों, होटलों, कारखानों, वाणिज्य भवनों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, कार्यालयों व अन्य गैर आवासीय भवन मालिकों, किराएदारों या सेवा प्रदाताओं को नगर निगम में शुल्क जमा करने पर ही पार्किंग की अनुमति मिलेगी।
कैसे होगा संचालन
नगर निगम द्वारा विकसित पार्किंग स्थलों का संचालन वह स्वयं कराएगा या फिर ठेके पर कराएगा। इसके लिए अनुबंध किया जाएगा या फिर नीलामी की जाएगी। अधिक दर का प्रस्ताव देने वालों को ही ठेका देते हुए पार्किंग स्थल का निर्धारण किया जाएगा।
नहीं होगी मनमानी वसूली
नगर निगम यह सुनिश्चित करेगा कि ठेकेदार लोगों से अधिक पार्किंग शुल्क की वसूली न करे। पार्किंग स्थल पर ठेकेदार टोकन लगाने वाले कर्मचारियों के नाम का बोर्ड लगवाते हुए इसकी सूची नगर निगम को देगा।
ठेकेदार को गाड़ियों में लगाने वाला टोकन निकायों से पास कराना होगा। पार्किंग स्थल के आसपास शौचालय की व्यवस्था भी की जाएगी।
निर्धारित स्थल के अलावा अन्य स्थान पर गाड़ियां पार्क होने पर उसे नगर निगम उठवाकर यातायात पुलिस को सौंपेगा। इसके एवज में वाहन स्वामी से चालान राशि जमा कराई जाएगी।