लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग ने पैंक्रियाज कैंसर की जटिल सर्जरी अब रोबोट के जरिये करने की शुरुआत कर दी है। विभाग में पहली बार एक मरीज की रोबोटिक व्हिपल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। सर्जरी के बाद मरीज की हालत ठीक है। संस्थान का दावा है कि केजीएमयू प्रदेश का पहला सरकारी संस्थान है, जहां रोबोटिक पैंक्रियाटिक सर्जरी शुरू की गई है।
गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत चंद्रा ने बताया कि पैंक्रियाज के सिर के हिस्से में होने वाले कैंसर के लिए व्हिपल ऑपरेशन किया जाता है। यह बेहद जटिल सर्जरी है। इसमें पैंक्रियाज के सिर के साथ छोटी आंत का एक हिस्सा, पित्त नली और गॉल ब्लैडर निकालना पड़ता है। इसके बाद पाचन तंत्र को दोबारा जोड़कर उसकी संरचना तैयार की जाती है।
बड़ी रक्त वाहिकाओं के करीब होता है पैंक्रियाज
डॉ. अभिजीत चंद्रा ने बताया कि पैंक्रियाज शरीर की कई बड़ी रक्त वाहिकाओं के बेहद करीब स्थित होता है। ऐसे में कैंसर प्रभावित हिस्से को निकालते समय आसपास के महत्वपूर्ण अंगों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान से बचाना चुनौतीपूर्ण होता है। ऑपरेशन के बाद पाचन तंत्र में कई जगह दोबारा जोड़ बनानी पड़ती हैं। इसी वजह से व्हिपल सर्जरी को बेहद जटिल ऑपरेशनों में शामिल किया जाता है।
छोटे चीरे से संभव हुई जटिल सर्जरी
विभाग के डॉ. रोहित ने बताया कि रोबोटिक तकनीक में शरीर के छोटे और संवेदनशील हिस्सों को अधिक स्पष्टता से देखने और सटीकता के साथ सर्जरी करने में मदद मिलती है। पारंपरिक सर्जरी की तुलना में इसमें छोटे चीरे, कम रक्तस्राव, ऑपरेशन के बाद कम दर्द और अस्पताल में कम समय रहने जैसे फायदे हो सकते हैं। मरीज के जल्द सामान्य जीवन में लौटने में भी मदद मिल सकती है।
पैंक्रियाज के दो अहम काम
पैंक्रियाज पाचन और ब्लड शुगर नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। यह ऐसे एंजाइम बनाता है जो भोजन में मौजूद वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट को तोड़ने में मदद करते हैं। साथ ही इंसुलिन और ग्लूकागन जैसे हार्मोन बनाकर रक्त में शुगर का स्तर नियंत्रित करता है। पैंक्रियाज से जुड़ी बीमारियों के साथ कैंसर के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।