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Lucknow News: मंच पर उतरी पद्मा सचदेव की कहानी अब न बनेगी देहरी

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नाटक अब न बनेगी देहरी का मंचन करते कलाकार
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लखनऊ। डोगरी भाषा की सुप्रसिद्ध लेखिका पद्मश्री पद्मा सचदेव के हिंदी उपन्यास अब न बनेगी देहरी के नाट्य रूपांतरण का मंचन दूसरे दिन शुक्रवार को भी संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में किया गया। भारतेंदु नाट्य अकादमी के निदेशक बिपिन कुमार के निर्देशन व परिकल्पना में बीएनए रेपेटरी ने इसे मंच पर उतारा। इससे पहले बृहस्पतिवार को भी इसका मंचन किया गया था।
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नाटक की कहानी एक युवा विधवा रेवती के इर्द-गिर्द घूमती है। रेवती के पति की असामयिक मृत्यु के बाद गांव के मंदिर में नाटक की शुुरुआत होती है। रेवती मंदिर की बावड़ी में आत्महत्या करने की कोशिश करती है लेकिन शिव मंदिर के युवा महंत गिरी बाबा उसकी जान बचा लेते हैं। इसके बाद दोनों के बीच आध्यात्मिक प्रेम प्रस्फुटित होता है। गिरी बाबा ब्रह्मचारी हैं और वे समाज में अपने बने वर्चस्व को बचाने के लिए प्रेम का त्याग कर जीवित समाधि लेने को तैयार हो जाते हैं। वहीं रेवती सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर अपने जीवन की नई यात्रा पर निकल जाती है। रेवती की भूमिका श्रुतिकीर्ति सिंह और तिला रूपा सापकोटा ने निभाई जबकि आशुतोष जायसवाल ने गिरीबाबा का रोल निभाया। अन्य कलाकारों में अनिल चौधरी, अमित हरिश्चंद्र, राजश्री रॉय चौधरी, अंशु साहू, चैतन्य महाप्रभु त्रिपाठी, धीरज कुमार, अर्घ्य सामंत, वैष्णवी सेठ, अल्पन जौहरी, भावना द्विवेदी, अंकुर वर्मा, प्रदीप शिवहरे आदि ने प्रमुख भूमिकाएं निभाईं।

नाटक अब न बनेगी देहरी का मंचन करते कलाकार

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