लखनऊ। संगीत, लय और भावनाओं के सुर-ताल में बंधी जादुई शाम, जहां हर चक्कर, हर तिहाई और हर घुंघरू की झंकार ने दर्शकों को सम्मोहित कर दिया। शुक्रवार शाम गोमतीनगर के विपिन खंड स्थित संगीत नाटक अकादमी की वाल्मीकि रंगशाला में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के तत्वावधान में बनारस घराने की कथक नृत्यांगना सोनी सेठ ने प्रस्तुति दी। लय ताल देख हर आंखें ठहर गईं तो दिल धड़कनों की ताल पर थिरक उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ शाम करीब सात बजे गाइए गजपति जग वंदन... से हुआ, जिसमें सोनी सेठ ने अपनी भाव-भंगिमाओं और लयकारी से भगवान गणेश को समर्पित दिव्य वातावरण रच दिया। इसके बाद मंच पर पारंपरिक कथक उठान, आमद परन, चक्करदार परन, तिहाई, तोड़ा की प्रस्तुति हुई तो झंकार के बीच तालियों की गड़गड़ाहट बढ़ती गई। परफॉर्मेंस अपने शिखर पर तब पहुंची, जब सोनी सेठ ने होली का दादरा रंग डालूंगी आज रंग डालूंगी... पेश किया।
मंच पर बिखरे राग, भाव और गति के रंगों ने पूरे सभागार को वसंत के उल्लास से भर दिया, लेकिन असली समा तब बंधा, जब डिमिक डिमिक डमरू कर बाजे, प्रेम मगन नाचे भोला... की प्रस्तुति हुई। जैसे घुंघरुओं में महादेव स्वयं नृत्य कर रहे हों। इस संगीतमय शाम में आनंद किशोर मिश्रा ने गायन व हारमोनियम, देव नारायण मिश्र ने तबला व अंकित मिश्र ने सारंगी की संगत से प्रस्तुति में रोमांच भर दिया।