रायबरेली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ट्रक चोरी के एक मुकदमे में बड़ा फैसला सुनाया है। देर से ट्रक चोरी की सूचना देने और मामले में मुकदमा दर्ज होने का बहाना करके क्लेम को निरस्त करने के मामले में आयोग ने ने बीमा कंपनी को आंशिक रूप से दोषी करार दिया है। कंपनी को संबंधित वाहन के मालिक को 7.60 लाख रुपये का क्लेम देने का आदेश दिया है। साथ ही आयोग में मुकदमा होने के समय से छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी बीमा कंपनी को अदा करने को कहा गया है।लालगंज क्षेत्र के रूपई लालूपुर निवासी मृत्यंजय दीक्षित पुत्र हरिशंकर दीक्षित ने श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी से ऋण लेकर ट्रक खरीदा था। ट्रक का बीमा न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। 17 दिसंबर 2014 से 16 दिसंबर 2015 तक बीमा वैध होने की अवधि में 24 अप्रैल 2015 को कानपुर माल लादने के लिए जाते समय ट्रक खीरों थाना क्षेत्र में चोरी हो गया था। मामले में मुकदमा किया गया था।
ट्रक के मालिक ने एक जून 2015 को बीमा कंपनी को ट्रक के चोरी होने की सूचना दी। बीमा कंपनी ने देर से चोरी की सूचना देने साथ ही नियमानुसार क्लेम फार्म न भरने और मामले में मुकदमा दर्ज होने का बहाना करके क्लेम को खारिज कर दिया। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि समय से ऋण की किस्त भी फाइनेंस कंपनी में जमा नहीं की गई। क्लेम खारिज होने के बाद वाहन मालिक ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया और 20 अक्तूबर 2016 को क्लेम दिलाने के बाद वाद दायर कर दिया।
मुकदमे की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष मदन लाल निगम और सदस्य सुनीता मिश्रा ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को आंशिक रूप से दोषी करार दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि मुकदमा दर्ज मात्र इस आधार पर बीमा दावा खारिज नहीं किया जा सकता है कि कंपनी को देर से सूचना दी गई। आयोग से बीमा कंपनी को 7.60 क्लेम और वाद दायर होने की तिथि से छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया। आयोग ने कहा कि दोनों पक्ष परिवाद व्यय स्वयं निर्वहन करेंगे।