फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी बजट सत्रः सीएए विरोधी आंदोलन में हिंसा की न्यायिक जांच की मांग ठुकराई तो विपक्ष का हंगामा

Fri, 14 Feb 2020 11:08 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

-वेल में आए सपा, बसपा व कांग्रेस सदस्य, सरकार के खिलाफ की नारेबाजी, कार्यवाही स्थगित 
-संसदीय कार्यमंत्री ने कहा- 21 उपद्रवियों की मौत हुईं लेकिन पुलिस की गोली से कोई नहीं मरा
-नेता प्रतिपक्ष ने कहा, भाजपा के लोगों व पुलिस की गोली लगने से हुई आंदोलनकारियों की मौत 
विज्ञापन
यूपी विधानसभा - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नागरिकता संसोधित कानून (सीएए) व राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ आंदोलन के दौरान हिंसा व मौत की न्यायिक जांच की मांग स्वीकार नहीं किए जाने पर विधानसभा में समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) व कांग्रेस सदस्यों ने हंगामा किया। उन्होंने वेल में आकर नारेबाजी की तो अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित ने सदन की कार्यवाही 30 मिनट के लिए स्थगित कर दी। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि आंदोलन के दौरान 21 उपद्रवियों की मौत हुई है लेकिन पुलिस की गोली से कोई नहीं मरा। इस दौरान 7 जिलों में 61 पुलिसकर्मी गोली लगने से घायल हुए हैं।

विज्ञापन


शून्य काल में नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए सीएए-एनआरसी के विरोध में 19 व 20 जनवरी को प्रदेश में हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान हिंसा व आंदोलनकारियों की मौतों का मामला उठाते हुए सदन की कार्यवाही रोककर इस पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा, भाजपा सरकार ने आंदोलन घोषित होने के बाद धारा-144 लागू की और उत्पीड़न में जो अंग्रेज नहीं कर पाए, वह कर दिया। 

इस आंदोलन में अलग-अलग जिलों में 25 लोगों की जान गई है। लखनऊ में जब आंदोलनकारी चले गए तब मुंह में कपड़ा बांधकर लोग आए और बस-गाड़ी में आग लगाई। जामिया, जेएनयू व अलीगढ़ में किसने क्या किया, सामने आ चुका है। लोकतंत्र खतरे में है। भाजपा जब विपक्ष में होती है तब पुलिस पर यकीन नहीं करती और अब उसी की रिपोर्ट पर विश्वास कर रही है। चौधरी ने हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज से पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने और उत्पीड़नात्मक कार्रवाई तत्काल रोकने की मांग की।
विज्ञापन


ब्रिटिश हुकूमत केनक्शे कदम पर सरकार: लालजी
बसपा विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार ब्रिटिश हुकूमत के नक्शे कदम पर चल रही है। धारा 144 लगाकर शांतिपूर्ण आंदोलनों पर पाबंदी लगाई जा रही है। सीएए-एनआरसी विरोधी आंदोलन में 24 लोगों की मौत हुई है। मेरठ के एसपी लोगों से कह रहे हैं कि पाकिस्तान चले जाइये। लखनऊ में घंटाघर पर प्रदर्शन में महिलाओं के कंबल छीन लिए गए। बिलरियागंज और चौरीचौरा में आंदोलनकारियों का उत्पीड़न किया गया, मुकदमें लगाकर जेल भेज दिया गया। सीएए विरोधी आंदोलनकारियों से नुकसान की भरपाई के लिए वसूली करना सरकार का दोहरा मानदंड है। 

महिलाओं का उत्पीड़न शर्मनाक: आराधना
कांग्रेस की आराधना मिश्र ‘मोना’ ने कहा कि सीएए-एनआरसी के खिलाफ देश भर में आंदोलन हो रहे हैं। संविधान हमें अपनी बात कहने का अधिकार देता है। सीएए विरोधी आंदोलन में महिलाओं का उत्पीड़न दुखद है। बिलरियागंज में रात ढाई बजे उस पार्क में पानी भर दिया गया जिसमें महिलाएं धरना दे रहीं थी। इसकेबावजूद महिलाओं ने धैर्य नहीं खोया। पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया, एक महिला गंभीर हालात में अभी भी अस्पताल में भर्ती है।

समाधान करने केबजाय उकसाने की कोशिश की
सपा विधानमंडल दल के उपनेता इकबाल महमूद ने कहा कि संभल में सीएए-एनआरसी के खिलाफ धरना दे रहे लोगों पर जबरदस्त लाठीचार्ज किया गया। सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया। उनकी संपत्ति जब्त की जा रही है। आंदोलनकारियों से बातचीत करने के बजाए केंद्रीय गृहमंत्री कह रहे थे कि दिल्ली में मतदान से शाहीन बाग में करंट लगेगा। गोपालपुर से सपा विधायक नफीस अहमद ने अपने क्षेत्र के बिलरियागंज में महिला आंदोलनकारियों से पुरुष पुलिसकर्मियों की अभद्रता का जिक्र किया। कहा कि गरीबों, छात्रों को जेल भेजा जा रहा है। 

कानून हाथ में लेंगे तो पुलिस हाथ पर हाथ धर कर नहीं बैठेगी: : खन्ना 
संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए कहा कि केवल 7-8 जिलों में आंदोलन हिंसक हुआ। 7 जिलों में 61 पुलिसकर्मी गोली लगने से घायल हुए हैं। कोई भी कानून हाथ में लेगा तो पुलिस हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठेगी। खन्ना ने कहा कि सीएए कानून में किसी भी हिंदुस्तानी के खिलाफ कुछ नहीं है। इसमें एक भी लाइन ऐसी नहीं है जिससे किसी का अधिकार प्रभावित होता हो। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा। इसीलिए विपक्ष ने इस आंदोलन को हवा दी। असली सवाल यह है कि हमलावर कौन थे, हिंसा की शुरुआत किसने की? पुलिस ऐसे में कार्यवाही नहीं करती तो क्या करती? उन्होंने कहा कि पूरे आंदोलन में 21 उपद्रवियों की मौत हुई है। ये आपस में फायरिंग में मारे गए। आंदोलन के नाम पर हिंसा व आगजनी की गई।

434 मुकदमों में 4875 नामजद, 1635 गिरफ्तार
खन्ना ने कहा, सीएए विरोधी आंदोलन में उपद्रव करने पर कुल 434 अभियोग पंजीकृत हुए, 4875 लोगों को नामजद किया गया। इनमें से 1635 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उपद्रवियों से संपत्ति वसूली का शासनादेश 8 जनवरी 2011 को बसपा सरकार में जारी किया गया था। इस पर बसपा के लालजी वर्मा ने कहा कि पहले कभी इसे लागू नहीं किया गया। खन्ना ने कहा कि आदेश को लागू करने केलिए हिम्मत चाहिए। योगी सरकार में हिम्मत है जो इसे लागू कर रही है। शांतिपूर्ण आंदोलनों का स्वागत है लेकिन किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। 

विपक्षी सदस्य वेल में आए, स्थगित हुई कार्यवाही
संसदीय कायमंत्री के जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यस्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया। इस पर सपा, बसपा व कांग्रेस सदस्य वेल में आ गए। सदस्य पीड़ितों को इंसाफ दो, पुलिस के बल पर ये सरकार नहीं चलेगी, जैसे नारे लगाने लगे। अध्यक्ष ने सदस्यों से सीट पर लौटने की अपील की। सदस्यों के वेल में नारेबाजी करते रहने पर अध्यक्ष ने 11.39 बजे सदन की कायवाही 30 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें