लखनऊ। विद्युत सुरक्षा निदेशालय की टीम ने शनिवार को मोहनलालगंज उपकेंद्र पहुंचकर संविदाकर्मी राजेश कुमार की करंट से हुई मौत के मामले की जांच की। अब तक की जांच में उपकेंद्र ऑपरेटर सुशील और एक जूनियर इंजीनियर (जेई) की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। हालांकि, ऑपरेटर की लापरवाही प्रमुख रूप से सामने आई है। सुरक्षा निदेशालय की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
जांच टीम ने उपकेंद्र ऑपरेटर सुशील, 33 केवी के जेई विनीत कुमार, 11 केवी के जेई विजय शर्मा, उपखंड अधिकारी सौरभ मौर्य, दिवंगत संविदाकर्मी राजेश की पत्नी ज्ञानवती और उनके बेटों के बयान दर्ज किए। शुरुआती जांच में सामने आया कि ऑपरेटर ने गलती से बंद बिजली की आपूर्ति दोबारा चालू कर दी, जिससे लाइन पर काम कर रहे राजेश कुमार करंट की चपेट में आ गए। झुलसने के बाद वह नीचे गिर पड़े और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
दरअसल, संविदाकर्मी राजेश कुमार और महानंद 11 हजार वोल्ट की बंद लाइन पर काम कर रहे थे। दोनों संविदाकर्मियों ने उपकेंद्र ऑपरेटर से शटडाउन लिया था। काम पूरा होने की सूचना महानंद ने ऑपरेटर को दी, जिसके बाद उसने 11 केवी फीडर की बिजली चालू कर दी। इससे डबल पोल लाइन में जोरदार धमाका हुआ और करंट की चपेट में आए राजेश नीचे गिर पड़े।
11 केवी लाइन की जिम्मेदारी जेई के पास
पावर कॉर्पोरेशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने इसी साल जारी आदेश में 11 केवी लाइन की जिम्मेदारी जूनियर इंजीनियर को सौंपी थी। इसके तहत लाइन की बिजली बंद कराने और दोबारा चालू करने के लिए जेई को उपकेंद्र ऑपरेटर को निर्देश देना अनिवार्य है। कोई भी कर्मचारी सीधे ऑपरेटर से शटडाउन लेकर काम पर नहीं जा सकता।