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Lucknow News: बिना बाईपास सर्जरी रेट्रोग्रेड विधि से दिल की बंद नसें खोलना संभव

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लखनऊ। लोहिया संस्थान में कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. सुदर्शन विजय के मुताबिक पूरी तरह से बंद हो चुकीं दिल की नसें बिना बाईपास सर्जरी के रेट्रोग्रेड विधि से खोली जा सकती हैं। इसके लिए विपरीत दिशा में विशेष प्रकार का तार डाला जाता है। शहीद पथ स्थित होटल में चल रही इंडो-जैपनीज कॉन्फ्रेंस में शनिवार को उन्होंने यह जानकारी दी।
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डॉ. सुदर्शन ने बताया कि सामान्य एंजियोप्लास्टी में 15 मिनट से आधे घंटे तक का समय लगता है तो रेट्रोग्रेड विधि में दो से चार घंटे लग जाते हैं। इसमें कुछ विशेष कैथेटर व तार की जरूरत होती है और 70-80 हजार रुपये का खर्च आता है।



डॉ. सुदर्शन ने बताया कि दिल की मुख्य नसें सौ फीसदी बंद होने पर दूसरी तरफ मौजूद पतली नसों से दिल को खून पहुंचने लगता है। वहीं, मुख्य नसें ब्लॉक होने से सीने में दर्द होता रहता है। ऐसे में मुख्य नसों को खोला जाना जरूरी होता है। लंबे समय तक बंद रहने से नसें पत्थर की तरह सख्त हो जाती हैं। इस कारण तार से सीधे इनका ब्लॉकेज नहीं खोला जा सकता। जिन पतली नसों से दिल को खून मिलता है, उनके माध्यम से ब्लॉकेज खोला जाता है।
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रेट्रोग्रेड विधि में सामान्य तकनीक के विपरीत एक साथ दो तार अलग-अलग स्थान से डाले जाते हैं। एक तार मुख्य नस के ब्लॉक वाले स्थान तक पहुंचता है तो दूसरा पतली नसों से होते हुए मुख्य नस के विपरीत स्थान से होकर ब्लॉक तक पहुंचता है। पीछे की ओर से ब्लॉक खोलना आसान होता है। इस ओर से आने वाले तार को मुख्य नस से डाले गए तार से निकाला जाता है। इसके बाद गुब्बारा तकनीक से नस को सामान्य अवस्था में लाया जाता है।



संस्थान में अब तक 40 सफल प्रोसीजर



डॉ. सुदर्शन ने बताया कि लोहिया संस्थान में अब तक 40 मरीजों की रेट्रोग्रेड विधि से एंजियोप्लास्टी की जा चुकी है। इनमें से कई ऐसे थे जिन्हें अन्य अस्पतालों में बाईपास सर्जरी की सलाह दी गई थी।
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