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एसजीपीजीआई में लिवर मरीजों के लिए ओपीडी फरवरी से

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चंद्रभान यादव
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एसजीपीजीआई में फरवरी में डिपार्टमेंट ऑफ हीपैटोलॉजी शुरू हो जाएगी। नियामक मंडल की बैठक में इसे मंजूरी भी दी जा चुकी है।
संकाय सदस्यों और रेजीडेंट डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसके शुरू होने से लिवर से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे प्रदेश के मरीजों को दिल्ली या मुंबई नहीं जाना पड़ेगा।
वहीं लिवर प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे मरीजों को भी राहत मिलेगी। निदेशक प्रो. आरके धीमान का कहना है किविभाग के लिए नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर फरवरी के अंतिम सप्ताह तक ओपीडी शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
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एसजीपीजीआई, केजीएमयू और लोहिया संस्थान में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी डिपार्टमेंट है। लेकिन हीपैटोलॉजी विभाग नहीं है।
ऐसे में लिवर संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को दिल्ली, मुंबई सहित अन्य शहरों के लिए रेफर किया जाता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि लिवर से जुड़ी बीमारियाें का जितनी जल्दी पता चलेगा उतना ही इलाज आसान हो जाता है।
6 संकाय सदस्य और 6 सीनियर रेजीडेंट नियुक्त होंगे
एसजीपीजीआई हीपैटोलॉजी विभाग शुरू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए 6 संकाय सदस्य और 6 सीनियर रेजीडेंट नियुक्त होंगे। वहीं 50 से अधिक नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति चल रही है। मरीजों को भर्ती करने के लिए 40 बेड का अलग वार्ड तैयार किया गया है। 4 बेड का आईसीयू और 6 प्राइवेट रूम भी इस विभाग के लिए अलॉट किया गया है।
इलाज के साथ शुरू होंगे नए कोर्स
प्रो. धीमान ने बताया कि नया विभाग शुरू होने से प्रदेश और आसपास के प्रदेश के मरीजों को इलाज मिलेगा। इसके साथ ही यहां नए चिकित्सा विशेषज्ञ तैयार करने, लिवर से जुड़ी बीमारियों पर शोध करने, नई दवाएं तैयार करने के अभियान में भी तेजी आएगी। विभाग शुरू होने के बाद डीएम कोर्स के साथ ही कई डिप्लोमा कोर्स भी शुरू किए जाएंगे। यहां से तैयार होने वाले विशेषज्ञ विभिन्न अस्पतालों में जाकर मरीजों का प्रथम स्टेज में ही इलाज शुरू कर सकेंगे।
प्रत्यारोपण क्लीनिक भी चलेगी
प्रो. आरके धीमान ने बताया कि लिवर प्रत्यारोपण से पहले एक अलग क्लीनिक शुरू की जाएगी। इसमें लिवर प्रत्यारोपण कराने वालों की काउंसिलिंग, जांच की जरूरत, डोनर की जांच और काउंसिलिंग सहित अन्य प्रक्रियाएं पूरी की जा सकेंगी। प्रत्यारोपण के बाद इस क्लीनिक में संबंधित मरीज को नियमित तौर पर फॉलोअप में बुलाया जाएगा। क्लीनिक में प्रदेश के मरीजों के साथ ही आसपास केे प्रदेशों के मरीजों को भी फायदा मिलेगा।
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पांच से सात लाख में हो सकेगा प्रत्यारोपण
हीपैटोलॉजी विभाग की ओपीडी शुरू होने से यहां लिवर प्रत्यारोपण फिर से शुरू हो सकेगा। संस्थान में पहले करीब 21 लोगों का प्रत्यारोपण किया गया था। लेकिन डेढ़ साल से यह बंद है। इसी तरह केजीएमयू में भी 11 लोगों के प्रत्यारोपण के बाद से प्रक्रिया बंद है। लिवर ट्रांसप्लांट के लिए कॉरपोरेट अस्पतालों में करीब 30 से 40 लाख रुपये तक का खर्च आता है। यहां पांच से सात लाख के अंदर प्रत्यारोपण हो सकेगा।
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