लखनऊ। राजधानी के बाजारों में बुधवार से भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस लेकर हॉलमार्किंग युक्त सोने के गहना बेचना अनिवार्य होगा। यानी अब ज्वैलर्स ग्राहक को सोने की कीमत में मिलावटी गहने नहीं बेच सकेंगे। कारोबारियों को शुद्ध सोने के गहने ही बेचने होंगे। जो कारोबारी ऐसा नहीं करेंगे उनके खिलाफ भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भारतीय मानक ब्यूरो की नई व्यवस्था में सोने के सिर्फ 14, 18 एवं 22 कैरेट के गहने ही बिकेंगे। अब कोई कारोबारी गहने पर 18 कैरेट का हॉलमार्क का ठप्पा लगाकर 14 कैरेट का सोना नहीं बेच सकेगा। कारोबारियों ने बताया कि सोने के गहने में तांबा, चांदी, जस्ता एवं एलॉय धातुओं की मिलावाट होती रही है। अब ग्राहकों को गहने में इन धातुओं की मात्रा को कम और सोना अधिक बताकर बेचने का खेल खत्म हो जाएगा। उधर, लखनऊ महानगर सराफा एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप कुमार अग्रवाल ने बताया कि पहले हॉलमार्किंग को एक जून से लागू होना था। मगर, केंद्र ने 15 दिन की मोहलत दी थी, जिससे 16 जून से हॉल मार्किंग व्यवस्था लागू हो जाएगी।
3000 में से 600 का ही पंजीयन
इंडियन ज्वैलर्स एवं बुलियन एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग रस्तोगी ने बताया कि लखनऊ में मंगलवार शाम पांच बजे तक 600 सराफा कारोबारी भारतीय मानक ब्यूरो में पंजीयन करा चुके थे। और कारोबारियों के पंजीयन कराने का सिलसिला जारी है। जो कारोबारी पंजीयन नहीं करा सके हैं, वे बुधवार को अपनी दुकान में सिर्फ चांदी के ही गहने बेच पाएंगे। एसोेसिएशन के मीडिया प्रभारी उमेश पाटिल ने बताया कि लखनऊ में कुल आठ हॉलमार्किंग सेंटर हैं, जिसमें सात चौक व एक अमीनाबाद बाजार में है।
75 जिलों में 61 हॉलमार्किंग सेंटर
ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय सचिव राजीव रस्तोगी ने बताया कि प्रदेश में 75 जिलों में 80 हजार कारोबारी सोने के गहने बेचने का कारोबार करते हैं। पर, इन गहनों को हॉलमार्किंग कराने की सुविधा सिर्फ 18 जिलों के 61 सेंटर पर है। बुंदेलखंड के अधिकतर जिलों में हॉलमार्किंग सेंटर नहीं हैं। कारोबारियों को इस कार्य के लिए गहने की गठरी लेकर कानपुर आना पड़ेगा, जिससे उनके साथ अप्रिय घटना होने का अंदेशा बना रहेगा।