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100 बेड के कोविड अस्पताल में सिर्फ तीन मरीज

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100 बेड के कोविड अस्पताल में सिर्फ तीन मरीज
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सरकारी के बजाय निजी अस्पतालों में भेजे जा रहे कोरोना संक्रमित
राजधानी में कोरोना संक्रमित मरीजों को सरकारी के बजाय निजी अस्पतालों में भेजने पर अधिक जोर दिया जा रहा है। नतीजा 100 बेड वाले राम सागर मिश्रा अस्पताल में मात्र तीन मरीज भर्ती हैं। जबकि अस्पताल के डॉक्टर व कर्मियों के होटल, खाना समेत अन्य खर्चे पर एक दिन का बिल एक लाख से अधिक आ रहा है।
सरकार की ओर से खर्च किए जा रहे रुपयों का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। सरकारी कोविड अस्पतालों में बेड खाली होने के बाद भी मरीजों को निजी कोविड अस्पताल भेजा जा रहा है। इसके पीछे क्या कारण क्या है, इसका जवाब किसी के पास नहीं। सीतापुर रोड स्थित राम सागर मिश्र अस्पताल में करीब एक सप्ताह से सिर्फ दो कोरोना मरीज थे, बृहस्पतिवार को एक नया मरीज आने से संख्या तीन हो गई। इन मरीजों के इलाज व देखरेख के लिए 25-30 का स्टाफ है, जिसे एक निजी होटल में क्वारंटीन की सुविधा मिलती है। इस होटल का रोजाना का बिल एक लाख रुपये से अधिक का है। महीने भर में होटल को 30 लाख रुपये से अधिक का बिल अदा किया जा चुका है। कुछ समय पहले ही अस्पताल को लेवल-1 से लेवल-2 में बदला गया, मगर सुविधाओं में बढ़ोतरी नहीं की गई। अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीके सिंह का कहना है कि कोरोना मरीजों को अस्पताल में शिफ्ट करने का जिम्मा सीएमओ व कोविड कंट्रोल रूम का है।
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... तो यहां सामान्य मरीजों को मिले इलाज
राम सागर मिश्रा अस्पताल में भर्ती दो तीन मरीजों को यदि दूसरे कोविड अस्पताल में शिफ्ट करा दिया जाए तो यहां सामान्य मरीजों को इलाज मिल सकता है। मगर ऐसा नहीं किया जा रहा है। एक माह से यहां पांच से अधिक मरीज नहीं हुए जबकि अन्य कोविड अस्पतालों में कोरोना के बेड खाली हैं। कार्यवाहक सीएमओ डॉ. एमके सिंह ने कहा कि इस समस्या की जानकारी मिली है। इस पर विचार किया जा रहा है। नव नियुक्त सीएमओ के निर्देश के बाद मामले में उचित निर्णय ले लिया जाएगा।
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