लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस की ऑनलाइन व्यवस्था में दलालों की घुसपैठ है। सिस्टम को बाईपास कर लर्नर लाइसेंस से लेकर रिन्यूवल तक के काम हो रहे हैं। दलालों की इस घुसपैठ को रोकने के लिए लूपहोल्स खोजे जाएंगे। इसके लिए परिवहन विभाग तैयारियां कर रहा है। आईटी विशेषज्ञों की मदद से सेंधमारी की जगहों को तलाशकर उसे खत्म किया जाएगा।
परिवहन विभाग की नई व्यवस्था के तहत बिना आरटीओ आए ही लर्नर लाइसेंस बन रहे हैं। सिर्फ परमानेंट लाइसेंस के लिए टेस्ट देने कार्यालय आना पड़ता है। चूंकि ऑनलाइन व्यवस्था जटिल है, इसलिए उसका फायदा दलाल उठाते हैं। काम के एवज में आवेदकों से मोटी रकम वसूलते हैं। वृहस्पतिवार को भी दलालों ने कानपुर देहात एआरटीओ में माधव सिंह का लाइसेंस रिन्यू कर दिया। इसमें हेल्थ सर्टिफिकेट नहीं लगाया गया। इस काम के एवज में पांच हजार रुपये लिए गए, जबकि फीस मात्र 400 रुपये है।
सर्वर की सुस्ती है दलालों की ताकत
लाइसेंस आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन है, लेकिन सर्वर सुस्त होने के कारण आवेदक दलालों के चक्कर में फंस जाते हैं। वे आसानी से फॉम भरने से लेकर पेमेंट तक के काम नहीं कर पाते। ऐसे में दलाल उनसे आसानी से काम करवाने का दावा करते हैं, जिसके एवज में मोटी रकम लेते हैं।