खाद्य सामग्री की खरीद फरोख्त से जुड़ी हर छोटी बड़ी दुकानें व ठेला खोमचा लगाने वाले दुकानदार बुधवार से फूड एक्ट 2006 के दायरे में आ जाएंगे।
ऐसे में खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) में ऑनलाइन पंजीयन व रजिस्ट्रेशन न कराने वाले कारोबारियों पर एक्ट के प्रावधानों के तहत 1 से 5 लाख तक का जुर्माना और छह माह की जेल की सजा झेलनी पड़ सकती है।
प्रशासन द्वारा फूड एक्ट के तहत एफएसडीए में ऑनलाइन पंजीयन व रजिस्ट्रेशन कराने की मियाद मंगलवार को खत्म हो रही है।
इसके बाद जांच पड़ताल में पंजीयन व रजिस्ट्रेशन का प्रमाणपत्र न दिखाने वाले कारोबारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
इस परेशानी से बचने के लिए कारोबारी घर बैठे अपने कारोबार की श्रेणी का निर्धारण, निर्धारित शुल्क जमा करने, आवश्यक प्रपत्र अपलोड कराने की सुविधा के साथ नए पंजीयन या लाइसेंस या नवीनीकरण के लिए एफएसडीए की वेबसाइट www.fssai.gov.in पर क्लिक कर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अथवा लाइसेंस पंजीकरण कर सकते हैं।
एफएसडीए के नोडल अधिकारी व सिटी मजिस्ट्रेट पीपी पाल ने बताया कि केंद्रीय भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने जनमानस को सुरक्षित व गुणवत्तायुक्त सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सामग्री की खरीद फरोख्त से सभी छोटे-बड़े कारोबारियों के लिए एफएसडीए में ऑनलाइन पंजीयन व रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता लागू की है।
हालांकि कारोबारियों की उदासीनता के कारण शहर में खाद्य सामग्री के कारोबार से जुड़े करीब 15 हजार छोटे दुकानदारों में से अभी तक मात्र पांच हजार का ही ऑनलाइन पंजीयन हो पाया है।
जबकि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की स्थिति और खराब है। बड़े कारोबारियों की श्रेणी में आने वाले तीन हजार से अधिक दुकानदारों में से मात्र 800 ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है।
सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि तय मियाद के बाद जांच पड़ताल में बिना पंजीयन लाइसेंस के चलती मिली दुकानों के खिलाफ एफएसडीए एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी जेपी सिंह ने बताया कि सालाना 12 लाख रुपये से अधिक का कारोबार करने वाले बड़े कारोबारियों को एक्ट के तहत ऑनलाइन लाइसेंस की अनिवार्यता के दायरे में रखा गया है।
अब ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन न कराने वाले कारोबारियों के खिलाफ एसीजीएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। ऐसे मामले में आरोपी पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना व छह माह की जेल की सजा का प्रावधान है।
इसी तरह सालाना 12 लाख रुपये से कम के कारोबारियों को छोटा मानते हुए सिर्फ ऑनलाइन पंजीयन के दायरे में रखा गया है। पंजीयन न कराने वाले कारोबारियों का मुकदमा एडीएम पूर्वी की कोर्ट में दर्ज करा कार्रवाई होगी।
इस मामले में 1 लाख रुपये तक जुर्माना व छह माह जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है।