लखनऊ। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में एक जनवरी 2025 से ऑनलाइन वाद दर्ज कराने की सुविधा शुरू की गई थी। इससे उपभोक्ताओं को काफी सहूलियत भी हुई है, वादों की संख्या भी बढ़ी है। वर्ष 2022 में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय के यहां केवल 380 मामले दर्ज हुए थे। वहीं, 2025 में यह संख्या 642 पहुंच गई।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय में वर्ष 2023 में 377 वाद दर्ज हुए थे। 2024 में 496 वाद दर्ज हुए, लेकिन 2025 में ऑनलाइन सुविधा मिलने के बाद यह संख्या एक साल में 642 पहुंच गई। 2026 में भी केवल चार महीनों के भीतर ही अब तक 209 नए मामले दर्ज हो चुके हैं। यहां आने वाले मामलों में अधिकांश इंश्योरेंस क्लेम से संबंधित होते हैं, जबकि दूसरे नंबर पर इलेक्ट्रॉनिक आइटम की खरीदारी से संबंधित मामले आते हैं।
इस मामले में उपभोक्ता मामलों के अधिवक्ता विजय यादव का कहना है कि सुविधा तो जरूर बढ़ी है, लेकिन प्रक्रिया जटल होने से आम उपभोक्ता परेशान भी होते हैं और उनका धन भी ज्यादा खर्च होता है। उन्होंने कहा कि आए दिन पोर्टल पर आने वाली तकनीकी खामियों से भी परेशान होना पड़ता है।
...लेकिन कोर्ट संख्या प्रथम में मामला उलटा
एक ही भवन में चलने वाली दोनों उपभोक्ता अदालतों में से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम में वादों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। इसका बड़ा कारण यह भी है कि यहां सितंबर 2025 से यहां किसी भी अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी है। कुछ महीनों से स्टेनो भी नहीं हैं। यहां तैनात स्टेनो को बाराबंकी से अटैच किया गया है। आंकड़ें देखें तो यहां वर्ष 2022 में आने वाले वादों की संख्या 675 थी, जो 2023 में 580, 2024 में 560 और 2025 में 386 रह गई। वर्ष 2026 में अब तक केवल 88 नए मामले ही आए हैं।