लखनऊ। पॉक्सो एक्ट के मामले में कोर्ट के बार-बार कहने के बाद भी पीड़िता को गवाही के लिए पेश न करने और कोर्ट में रिपोर्ट पेश न करने पर पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश श्याम मोहन जायसवाल ने शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने हजरतगंज कोतवाली के अतिरिक्त इंस्पेक्टर रहे प्रमोद कुमार पांडेय के आचरण को निंदनीय, घोर लापरवाहीपूर्ण और उपेक्षापूर्ण मानते हुए उन पर एक हजार रुपये हर्जाना लगाया है।
कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर और पुलिस के डीडीओ को आदेश की प्रति भेजकर निर्देश दिया कि वह एक हजार रुपये इंस्पेक्टर के वेतन से काटकर उसे डीएलएसए लखनऊ के खाते में जमा कराएं और इसकी रिपोर्ट 17 नवंबर तक कोर्ट में भेजें। पत्रावली के अनुसार वादी ने आठ फरवरी 2015 को अपनी नाबालिग बहन को बहलाकर भगा ले जाने के मामले में आरोपी धर्मराज के खिलाफ हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने मामले में विवेचना के बाद आरोपी धर्मराज के खिलाफ दुष्कर्म के साथ ही पॉक्सो एक्ट की धाराओं में 24 अप्रैल 2015 को चार्जशीट दाखिल की थी। आरोपी धर्मराज जेल में है। इतने बरस बीत गए मगर अभियोजन ने केवल एक गवाह ही पेश किया। जबकि कोर्ट पीड़िता को गवाही के लिए पेश करने का लगातार आदेश दे रही है।
गत 18 अक्तूबर को कोर्ट ने आदेश दिया कि इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार पांडेय व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर स्पष्टीकरण दें अन्यथा कानूनी कार्यवाही की जाएगी। इसके बावजूद इंस्पेक्टर कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। उन्होंने एक रिपोर्ट भेजकर कोर्ट को बताया कि जिस जगह पीड़िता रहती थी वहां अब बिल्डिंग बन गई है। पीड़िता का पता नहीं चला रहा है। इंस्पेक्टर ने कोई स्पष्टीकरण भी नहीं भेजा।
इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। कहा कि उसी पते पर पीड़िता का भाई रहता था। पुलिस ने उसे ढूंढकर तो गवाही करा दी मगर पीड़िता को क्यों नहीं ढूंढ पा रही है। कोर्ट ने कहा इंस्पेक्टर की लापरवाही व उपेक्षापूर्ण आचरण के कारण इस मामले की सुनवाई में अनावश्यक देरी हो रही है। लिहाजा इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार पांडेय पर हर्जाना लगाया जाता है।