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Lucknow News: गर्भावस्था के दौरान एक तिहाई महिलाओं को मधुमेह का खतरा

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लखनऊ। केजीएमयू में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष प्रो. अंजू अग्रवाल के मुताबिक, गर्भावस्था के दौरान हर तीन में से एक महिला के खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। इसे जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भकालीन मधुमेह) कहा जाता है। प्रसव के बाद यह डायबिटीज ठीक तो हो जाती है, लेकिन इनमें से आधी महिलाओं को भविष्य में डायबिटीज होने का खतरा रहता है। इसलिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत हर महीने इसकी जांच करानी चाहिए।
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डॉ. अंजू अग्रवाल ने बताया कि गर्भकालीन डायबिटीज के दौरान पेंक्रियाज ज्यादा इंसुलिन पैदा करने लगता है, लेकिन इंसुलिन ब्लड शुगर के स्तर को नीचे नहीं ला पाता। इसकी वजह यह है कि इंसुलिन प्लेसेंटा (गर्भनाल) से होकर नहीं गुजरता, जबकि ग्लूकोज व अन्य पोषक तत्व गुजर जाते हैं। इसी वजह से गर्भ में पल रहे बच्चे का भी ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। इसके चलते बच्चा मोटा और समय से पहले हो सकता है। इसके साथ ही कुछ समय के लिए सांस की तकलीफ हो और दिल में छेद की आशंका भी हो सकती है।



ऐसे करें बचाव

गर्भावस्था में डायबिटीज से बचने के लिए सही खानपान के साथ ही सक्रिय जीवनशैली, चिकित्सीय देखभाल, ब्लड शुगर स्तर की नियमित जांच करानी चाहिए।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत कराएं जांच

नियमित ओपीडी के अलावा हर माह की 1, 9, 16 और 24 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस मनाया जाता है। इस दिन गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य केंद्र पर सभी जांच करा सकती हैं।
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