लखनऊ। करीब छह महीने से फुल शिवरी प्लांट में कूड़ा डालने की जगह नहीं बची है। ऐसे में अब एक लाख मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण कर जगह खाली कराई जाएगी, ताकि यहां शहर से रोजाना निकलने वाले कूड़े को डाला जा सके। इसके लिए टेंडर से निजी कंपनी का चयन कर लिया गया है। नगर निगम प्रशासन ने काम शुरू करने को लेकर ठेकेदार को वर्कऑर्डर जारी करने का आदेश भी मंगलवार को कर दिया। इस पर करीब चार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस काम में करीब तीन महीने से अधिक का समय लगेगा।
ईकोग्रीन के फेल होने के बाद नगर निगम ने डेढ़ महीने से प्लांट के संचालन की कमान अपने हाथ में ली है। करीब छह महीने पहले जब नगर निगम ने सर्वे कराया थो तो यहां 18 लाख मीट्रिक टन कूड़ा था। इसमें लगातार इजाफा हो रहा है, क्योंकि रोजाना जितना कूड़ा पहुंचता है निगम उसका आधा ही निस्तारित कर पा रहा है। इससे नया कचरा डालने की जगह का संकट बढ़ता जा रहा है।
जगह बनाने पर रोजाना खर्च हो रहे डेढ़ लाख
शिवरी प्लांट में शहर से निकलने वाला दो हजार मीट्रिक टन डालने के लिए रोजाना जगह बनानी पड़ती है। इसके लिए पांच पुकलैंड मशीनें दिनभर नीचे पड़े कचरे को कूड़े के पहाड़ पर चढ़ाती हैं। इससे जो जगह बनती है, वहां नया कचरा डाला जाता है। एक पुकलैंड मशीन पर रोजाना 200 लीटर डीजल खर्च होता है। ऐसे में पांचों मशीनों पर करीब 1000 लीटर डीजल खर्च हो रहा है। वहीं, पुकलैड मशीनों का किराया और इन्हें चलाने वाले कर्मचारियों का खर्च अलग है। कुल मिलाकर करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च रोजाना कूड़ा डालने के लिए जगह बनाने पर आ रहा है। इससे भी राहत न मिलने पर अब निगम ने एक लाख मीट्रिक कूड़े का निस्तारण एक साथ कराने का ठेका दिया है, ताकि इतनी जगह बन जाए कि कूड़ा डालने में समस्या न हो।
15वें वित्त के बजट से कराया जाएगा काम
शिवरी प्लांट पर करीब 20 लाख मीट्रिक टन कूड़ा जमा है। इसमें से 18 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण करने के लिए शासन 96 करोड़ का बजट स्वीकृत कर चुका है। यह काम जल निगम की सीएंडडीएस इकाई करेगी। नगर निगम ने अब जो एक लाख मीट्रिक टन कूड़ा निस्तारण का ठेका दिया है वह 18 लाख मीट्रिक टन के अतिरिक्त है। इसके खर्च का भुगतान भी 15वें वित्त के बजट से होगा।