केजीएमयू में दो और डॉक्टर कम हो गए हैं। इनमें से एक का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया, तो वहीं दूसरे को अनुशासनहीनता के मामले में बर्खास्त कर दिया गया है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में शुक्रवार को दोनों मामलों पर मुहर लगाई गई। बैठक में इसके अलावा शिक्षकों के अवकाश, प्रोन्नति के साथ ही कई अन्य अहम मामलों के प्रस्ताव पर भी कार्य परिषद ने सहमति जताई।
केजीएमयू में कुलपति ले. जनरल डॉ. बिपिन पुरी की अध्यक्षता में कार्य परिषद की बैठक आयोजित हुई। सबसे चर्चित मामला नेत्र विभाग के शिक्षक की बर्खास्तगी का रहा। इस शिक्षक पर कुलपति के साथ अनुशासनहीनता करने का आरोप लगा था। यह मामला पांच जनवरी 2022 को शुरू हुआ था, जब नेत्र रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. अपजित कौर ने कुलपति को पत्र लिखा था। इसमें 30 दिसंबर 2021 की घटना का हवाला दिया गया था, जिसमें कुलपति कार्यालय में हुई बैठक में आरोपी डॉक्टर पर असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करने की बात कही गई थी। इसके बाद 18 फरवरी को कार्य परिषद की बैठक में डॉक्टर को निलंबित किया गया। आरोपी डॉक्टर ने इसके खिलाफ न्यायालय में अपील की। जहां अदालत ने उनके निलंबन को गलत ठहराते हुए बहाली का आदेश दिया था। इसके बाद केजीएमयू कार्य परिषद ने डॉक्टर को जॉइन कराया और उसी दिन दोबारा बैठक बुलाकर निलंबित कर दिया। अब आरोपपत्र देकर डॉक्टर को बर्खास्त कर दिया गया है।
इससे पहले कार्य परिषद ने पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एक डॉक्टर को बर्खास्त किया था। यह मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है। कार्य परिषद ने क्रिटिकल केयर विभाग की डॉ. सुलेखा को डीएम कोर्स करने के लिए तीन साल की छुट्टी और मनोरोग विभाग के डॉ. मनु अग्रवाल को ऑस्ट्रेलिया में फेलोशिप के लिए एक साल की छुट्टी स्वीकृत की। इसके अलावा नर्सिंग कॉलेज की रीना कुमारी को दो साल के लिए डेप्युटेशन पर जालौन नर्सिंग कॉलेज के प्रिंसिपल पद के लिए छुट्टी दी गई है। इसके अलावा कई शिक्षकों के प्रमोशन पर भी कार्य परिषद ने अपनी मुहर लगाई है।
जारी है डॉक्टरों के जाने का सिलसिला
केजीएमयू का ऑर्गन ट्रांसप्लांट विभाग अब खाली हो गया है। यहां के एकमात्र डॉक्टर विवेक गुप्ता ने इस्तीफा दे दिया है। कार्य परिषद ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके बाद एक बार फिर से ऑर्गन ट्रांसप्लांट पर संकट मंडराने लगा है। संस्थान में पिछले दो-तीन साल से डॉक्टरों के इस्तीफे का सिलसिला जारी है। इससे पहले
केजीएमयू से डॉ. संदीप वर्मा, डॉ. साकेत, डॉ. विशाल, डॉ. प्रदीप जोशी, डॉ. संत कुमार पांडेय ने भी नौकरी छोड़कर अन्य संस्थान ज्वॉइन कर लिया था। वहीं इस मामले में केजीएमयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. केके सिंह का कहना है कि केजीएमयू में काम कर रहे डॉक्टरों को निजी संस्थान में कई गुना ज्यादा वेतन पर नौकरी का मौका मिलता है। मरीजों का दबाव भी यहां के मुकाबले कम रहता है। नौकरी छोड़कर जाने वाले ज्यादातर डॉक्टर यहां सुविधाओं की कमी और छोटी-छोटी चीजों के लिए भी अनावश्यक देरी होने की वजह से परेशान हो जाते हैं। जो डॉक्टर यहां काम कर रहे हैं, उसकी वजह मरीजों की सेवा और केजीएमयू जैसे उत्कृष्ट संस्थान से जुड़े रहने की भावना है।
एसआर और नॉन पीजी जेआर को मिलेगा मातृत्व अवकाश का लाभ
केजीएमयू में तैनात एसआर और नॉन पीजी जेआर को अब मातृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा। अभी तक इनको मातृत्व अवकाश की सुविधा नहीं मिलती थी। हाल के वर्षों में देखा गया है कि पढ़ाई के दौरान कई सीनियर रेजीडेंट को मातृत्व अवकाश की जरूरत पड़ती है। अभी तक इसकी व्यवस्था न होने से उनकी छुट्टी स्वीकृत नहीं हो पाती थी। इसको देखते हुए नई व्यवस्था शुरू की जा रही है।
मानव संपदा पोर्टल पर होगी सभी कार्मिकों की सालाना गोपनीय रिपोर्ट
केजीएमयू तकनीक के साथ कदमताल करते हुए एक पायदान और ऊपर चढ़ गया है। अब केजीएमयू के सभी कार्मिकों की सालाना गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड होगी। ऐसा होने पर उसमें किसी प्रकार के बदलाव की गुंजाइश दूर हो जाएगी।