एसएसपी एसटीएफ विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक पकड़े गये मास्टर माइंड ध्रुव श्रीवास्तव ने पूछताछ में कुबूल किया कि वह मई 2021 में लखनऊ अपने मित्र ज्ञानदेव पाल के साथ आया था। जहां आकाश कुमार से मुलाकात हुई। आकाश के जरिए ज्ञानदेव व ध्रुव एक ठेकेदार से मिले। उसने बताया कि मेरे पास एक हैकर है। यदि हम लोग बैंक के किसी अधिकारी को सेट कर लें तो बैंक के सिस्टम को रिमोट एक्सिस पर लेकर हम लोग लगभग 300 करोड़ रूपये अपने फर्जी खातों में ट्रांसफर कर लेंगे। इसके बाद हम लोगों की मीटिंग भूपेंद्र सिंह के माध्यम से उप्र कोआपरेटिव बैंक लि. महमूदाबाद के सहायक प्रबंधक कर्मवीर सिंह से हुई। इसके बाद मुंबई से एक हैकर को बुलाया गया। जिसको होटल कंफर्ट जोन चारबाग में ठहराया। हैकर ने एक डिवाइस तैयार की। जिसको कर्मवीर सिंह व ज्ञानदेव पाल डिवाइस को बैंक के सिस्टम में लगाते रहे।
आठ बार डिवाइस लगाने में नहीं मिली सफलता
एसटीएफ एसएसपी के मुताबिक पूछताछ में ध्रुव ने बताया कि डिवाइस लगाने का 8 बार प्रयास किया गया पर सफलता नही मिली। इसी बीच इनकी मुलाकात लोक भवन में तैनात अनुभाग अधिकारी रामराज से हुई। इन्हीं की टीम में उमेश गिरी था, जिसने पूर्व प्रबंधक आरएस दुबे से संपर्क किया। 14 अक्तूबर शुक्रवार को आरएस दुबे, रवि वर्मा व ज्ञानदेव पाल शाम 6 बजे के बाद बैंक गये, कीलागर इंसटॉल कर डिवाइस लगायी। दूसरे दिन सुबह 15 अक्तूबर शनिवार सुबह पांच टीमों के करब 25 लोग के साथ केडी सिंह बाबू स्टेडियम के पास पहुंचे। वहां से रवि वर्मा और पूर्व प्रबंधक आरएस दुबे बैंक के अंदर गये।
पूर्व प्रबंधक व रवि ट्रांजेक्शन के दौरान निकाल देते थे डिवाइस
ध्रुव ने एसटीएफ की पूछताछ में कुबूल किया कि बैंक के अंदर पूर्व प्रबंधक आरएस दुबे व रवि वर्मा गये थे। क्योंकि जब बाहर से ट्रांजेक्शन होता है तो वह लोग सिस्टम में इंसटाल साफ्टवेयर को अनइंसटाल कर देते, फिर सिस्टम में लगे डिवाइस व बैंक में लगे डीवीआर को निकाल लेते थे। लेकिन गार्ड ने उनको अंदर टोक दिया। इसके बाद वापस आ गये। लंच के बाद ज्ञानदेव पाल, उमेश गिरी, बैंकर व साइबर एक्सपर्ट के साथ मिलकर 146 करोड़ रुपये गंगा सागर सिंह के कंपनियों के अलग-अलग खातों में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर कर दिये।
एसएसपी एसटीएफ विशाल विक्रम के मुताबिक आरोपियों ने रकम गंगा सागर चौहान के खाते में आरटीजीएस करने के बाद लखनऊ-अयोध्या हाइवे पर बाराबंकी स्थित ब्रेक प्वाइंट ढाबे पर गये। वहां दो-तीन घंटे तक रुके और गंगा सागर चौहान के खाते में रकम ट्रांसफर होने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन रुपये गंगा सागर के खाते में ट्रांसफर नहीं हुए। वहीं गंगा सागर का खाता भी फ्रीज कर दिया गया। ध्रुव ने पुलिस के सामने कुबूल किया इसके बाद वह नैनीताल भाग गया। वहीं अन्य लोग भी अपने छिपने के ठिकाने पर चले गये।
एक साल में हैकर पर खर्च किये 30 लाख रुपये
एसएसपी एसटीएफ के मुताबिक जालसाजों का यह गिरोह 146 करोड़ की हेराफेरी के लिए 18 महीने से लगातार प्रयास कर रहे थे। मास्टर माइंड ध्रुव ने बताया कि उसने हैकर व गिरोह के अन्य सदस्य लगातार चारबाग इलाके के होटल में रुकते थे। एक साल तक लगातार कमरे बुक होते थे। एक साल में हैकरों व अन्य लोगों को रुकने के लिए 30 लाख रुपये खर्च किये। इसके अलावा 15 से 20 लाख रुपये और खर्च किये गये। इसके अलावा डिवाइस के लिए गिरोह के गंगा सागर चौहान, मास्टर माइंड रामराज, पूर्व प्रबंधक आरएस दुबे, सहायक प्रबंधक कर्मवीर सिंह सहित कुछ अन्य सदस्यों ने मिलकर 50 लाख रुपये खर्च किये थे। इस बात की पुष्टि एसटीएफ गिरफ्त में आये अन्य चारों आरोपियों ने भी की है।
नौकरी के नाम पर ठगी का भी हुआ खुलासा
एसएसपी एसटीएफ विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक के 146 करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में लोक भवन में तैनात अनुभाग अधिकारी रामराज भी गिरफ्तार किया गया। उससे पूछताछ में एसटीएफ को नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ। आरोपी रामराज के पास से 130 बेरोजगारों के अंक पत्र व प्रमाण पत्र भी मिले। रामराज ने बेरोजगारों को सरकारी विभागाें में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगे। पूछताछ में अनुभाग अधिकारी रामराज ने बताया कि उसने अपने साथी विनय गिरी से मिलकर 130 से अधिक बच्चों को सरकारी विभागों रेलवे में ग्रुप सी व डी, हाईकोर्ट, एनटीपीसी, टीजीटी, पीजीटी, एनम आदि में नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली की है। उनके यह प्रमाण पत्र सिक्योरिटी के तौर पर अपने पास रख लिया था।