लखनऊ। हजरतगंज थाना क्षेत्र के जियामऊ स्थित शत्रु संपत्ति पर कब्जा करके उसे धोखाधड़ी से अपने, भाई व पिता के नाम फर्जी रजिस्ट्री कराने के आरोपी माफिया मुख्तार अंसारी के पुत्र उमर अंसारी को आरोपों से मुक्त (डिस्चार्ज) करने की मांग वाली अर्जी खारिज हो गई है। एमपीएमएलए कोर्ट के विशेष एसीजेएम अम्बरीश श्रीवास्तव ने उमर अंसारी पर आरोप तय करने के लिए दो दिसंबर की तारीख तय की है।
उमर अंसारी को आरोपों से मुक्त करने की मांग वाली डिस्चार्ज अर्जी देकर कोर्ट को बताया गया था कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। कोर्ट ने आरोपी की अर्जी खारिज करते हुए कहा उसे एफआईआर में नामजद किया गया है, साथ ही आरोप है कि उसने शारदा नहर खंड दो के अधिशासी अभियंता के कार्यालय का कूटरचित अनुमति पत्र तैयार कराया और भवन के लिए मानचित्र स्वीकृत कराया।
पत्रावली के अनुसार इस मामले की रिपोर्ट लेखपाल सुरजन लाल ने 27 अगस्त 2020 को थाना हजरतगंज में दर्ज कराई थी। जिसमें आरोप लगाया था कि मुख्तार अंसारी और उसके बेटे अब्बास व उमर अंसारी ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सरकारी निष्क्रांत भूमि पर अपराधिक षड्यंत्र के तहत एलडीए से नक्शा पास कराया और उस पर अवैध निर्माण करके कब्जा कर लिया है।
कोर्ट को बताया गया कि जियामऊ स्थित ये जमीन मोहम्मद वसीम के नाम से दर्ज थी। देश के विभाजन के समय वसीम पाकिस्तान चले गए थे। लिहाजा उनकी जमीन सरकार में निष्क्रांत संपत्ति के रूप में निहित हो गई। बाद में ये जमीन बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के पहले लक्ष्मी नारायण के नाम और फिर कृष्ण कुमार के नाम दर्ज हो गई। आरोप यह भी है कि आरोपी उमर अंसारी, अब्बास अंसारी और मुख्तार अंसारी ने अपराधिक षड्यंत्र के तहत इस जमीन को हड़पा है। अभियोजन की ओर से आरोप लगाया गया कि माफिया मुख्तार अंसारी ने अनुचित दबाव डालकर शत्रु संपत्ति को अपने व बेटों के नाम पर दर्ज करा लिया था।