रामजन्मभूमि परिसर स्थित करीब 12 प्राचीन मंदिरों को अब गिराया जाएगा। इन प्राचीन मंदिरों में 1992 के बाद से ही पूजा अर्चना नहीं हुई है। यह निर्णय शनिवार को सर्किट हाउस में हुई राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में लिया गया है।
बैठक में तय हुआ कि इन प्राचीन मंदिरों को गिराया जाएगा, हालांकि मंदिरों में स्थापित भगवान के गर्भ गृह को राम मंदिर परिसर में ही कहीं स्थापित किए जाने पर भी निर्णय हुआ है।
ट्रस्ट की बैठक में शामिल महंत दिनेंद्र दास ने बताया कि बैठक में राम मंदिर के भूमि पूजन के साथ परिसर में स्थित पौराणिक मंदिर जिनमें 28 वर्षों से पूजा-अर्चना बंद है, उनको गिराने पर सहमति बन गई है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि इन प्राचीन मठ मंदिरों को ध्वस्त किया जाएगा, लेकिन इनमें विराजमान गर्भगृह को मंदिर परिसर में ही किसी स्थान पर स्थापित कर उनकी विधिवत नित नियम से पूजा अर्चना पहले की तरह करानी प्रारंभ की जाएगी।
उन्होंने बताया कि इसको लेकर संत समाज से भी चर्चा कर उनका मत लिया जाएगा। जन्मभूमि परिसर में रामलला की जन्मभूमि के अलावा अनेक त्रेतायुगीन धरोहर हैं।
इनकी पुष्टि जीर्ण-शीर्ण टीलों के साथ उस शिलालेख से भी होती है जिसे सन 1902 में एडवर्ड तीर्थ विवेचना सभा की ओर से लगवाया गया था। राम जन्मभूमि परिसर में कुबेर टीला के अलावा भगवान राम की लंका विजय में अहम भूमिका निभाने वाले वानर नल, नील व गवाक्ष के भी टीले हैं।
इसके अतिरिक्त कोहबर भवन, राम खजाना, आनंद भवन, लेटे हनुमान मंदिर, सीता रसोई, विश्वामित्र आश्रम सहित अन्य प्राचीन मंदिर है जिन्हें अब ध्वस्त करने की तैयारी है।