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ऊंट पहाड़ के नीचे

Wed, 16 Jul 2014 11:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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वह भी क्या दिन थे कि अपने ठाकुर साहब के नाम का डंका बजता था। जिसे चाहा उसे फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया। पर, समय का फेर।
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कहने को तो केंद्रीय सत्ता में नंबर दो हैं। पर, अपनी पसंद का एक पीएस तक नहीं रख पाए। वादा करके गए थे कि लखनऊ के भी जल्द ही अच्छे दिन आएंगे।

आने-जाने के लिए नई-नई रेलगाड़ियां मिलेंगी। स्टेशनों का कायाकल्प होगा। यह भी नहीं हो पाया। बुरा हो विरोधियों का जो जुटे हैं इसका प्रचार करने में। कह रहे हैं कि अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे ।
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