पिछले दिनों राज्य कर्मचारियों की हड़ताल में कुछ कर्मचारियों की पूरी मौज रही। दफ्तर में आकर सबसे पहले हाजिरी लगाना ही सबसे बड़ा काम था।
हाजिरी लगाने के बाद वे न तो ऑफिस में काम करते मिलते और न ही हड़ताल में शामिल दिखते।
हड़ताल के दौरान घर के सारे लंबित काम निपटा डाले। कुछ तो और भी शातिर निकले।
उन्होंने तो इस दौरान अपने रिश्तेदारों के यहां के शादी-विवाह व अन्य कार्यक्रम भी निपटा लिए। इस दौरान उन्हें बाहर जाने तक के लिए भी छुट्टी नहीं लेनी पड़ी।
ऑफिसों में भी हड़ताल के दौरान कोई पूछने वाला नहीं था। इसी को तो कहते हैं ‘हींग लगे न फिटकरी फिर भी रंग चोखा...।’