संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना अब समाप्त हो चुकी है, लेकिन जब तक यह योजना चली, घोटालेबाजों ने जमकर वारे-न्यारे किए।
आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) ने इस योजना में बलिया जिले के तत्कालीन अधिकारियों द्वारा वर्ष 2002 से 2005 के दौरान की गई अनियमितता की जांच में दो सीडीओ समेत 23 अधिकारी-कर्मचारी व सात कोटेदारों को दोषी पाया है।
जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, जिस पर शासन ने आगे की कार्यवाही करने की अनुमति दे दी है। अब आरोपियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के साथ ही इनकी गिरफ्तारी भी की जाएगी।
इस योजना के तहत विभिन्न जिलों में हुई अनियमितता की शिकायत पर शासन ने कुछ चुनिंदा जिलों को चिह्नित कर उनमें जांच के आदेश दिए गए थे। ईओडब्ल्यू के वाराणसी सेक्टर के इंस्पेक्टर ओंकार नाथ ने बलिया जिले में हुई नियमितता की जांच की थी।
इसमें सामने आया कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर योजना के तहत गरीबों को रोजगार सुनिश्चित करने के लिए आई रकम को तो हजम कर ही लिया गया, उन्हें जो खाद्यान्न वितरित किया जाना था, उसकी कालाबाजारी कर रकम हड़प ली गई।
इस घोटाले में बलिया में उस समय तैनात रहे दो सीडीओ समेत कई अधिकारियों-कर्मचारियों व कोटेदारों को दोषी पाया गया। शासन ने ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट पर आगे की कार्यवाही करने की अनुमति दे दी है।
अब जांच एजेंसी आरोपियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति के लिए आवश्यक पत्र व विभागीय कार्यवाही के लिए रिपोर्ट तैयार कर रही है।
ईओडब्ल्यू के सूत्रों का कहना है कि कोटेदारों की गिरफ्तारी के लिए हुकुम तहरीरी भेजी गई है। वहीं अधिकारियों व कर्मचारियों की गिरफ्तारी के लिए भी कार्यवाही शुरू की जानी है।