न्यू पेंशन स्कीम के खाते में एक चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी का पूरे सेवाकाल में 26 लाख 35 हजार 459 रुपये जमा होता है। इसमें आधी राशि सरकार का अंश होती है। सेवाकाल में मिली इस राशि पर न्यूनतम 8 प्रतिशत सालाना रिटर्न जोड़ा जाए तो सेवानिवृत्ति पर कुल राशि 63 लाख 3 हजार 611 रुपये बनी।
इसमें से रिटायर होने वाले कर्मचारी को 60 प्रतिशत राशि एकमुश्त दे दी जाती है, जबकि 40 प्रतिशत राशि पर पेंशन बनती है। यानी 37 लाख 82 हजार 167 रुपये एकमुश्त मिलते हैं। शेष 25 लाख 21 हजार 444 रुपये पर पेंशन बनती है।
सेवानिवृत्त होने वाला कर्मचारी यदि दोनों मदों में मिली राशि बैंक में जमा कर देता है तो न्यूनतम 8 प्रतिशत ब्याज मिलने पर एकमुश्त जमा राशि (60 प्रतिशत) पर 25212 रुपये और पेंशन मद (40 प्रतिशत) में जमा राशि पर 16810 रुपये प्रतिमाह ब्याज मिलेगा। दोनों को मिला दें तो 42024 रुपये हर महीने मिलेंगे।
पुरानी पेंशन स्कीम में शामिल सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का निधन होने पर उसकी पत्नी को 9 प्रतिशत डीए के साथ पेंशन की कुल राशि 29056 रुपये मिलेंगे। बशर्ते कर्मचारी ने जीपीएफ का 16 लाख रुपये न निकाला हो। वहीं, न्यू पेंशन स्कीम में पत्नी को भी पहले की तरह 42024 रुपये हर महीने मिलते रहेंगे। पुरानी पेंशन स्कीम में जहां पत्नी की भी मृत्यु होने पर 25 साल की उम्र पार चुके बच्चों की फैमिली पेंशन बंद हो जाती है, वहीं न्यू पेंशन स्कीम में यह 25 साल बाद भी जारी रहेगी।
शासन के उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि वित्त विभाग के विशेषज्ञ शीघ्र ही न्यू पेंशन स्कीम और पुरानी पेंशन स्कीम की तुलनात्मक गणना का प्रस्तुतीकरण सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने रखेंगे। वहीं, एनपीएस की विसंगतियों को दूर करने का सुझाव भी देंगे। इसमें पुरानी पेंशन स्कीम की तरह राशि का डबल एकाउंटिंग सिस्टम न होना और पुरानी देयता का जमा न होना आदि प्रमुख हैं। डबल एकाउंटिंग सिस्टम में कर्मचारी और सरकारी अधिकारी कभी भी जीपीएफ में जमा राशि चेक कर सकते हैं। हालांकि एनपीएस में फंड का रखरखाव करने वाली संस्था से जानकारी ले पाना टेढ़ी खीर है।