लखनऊ। इलाज में लापरवाही बरतने वाले निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग के अफसर मेहरबान हैं। जांच में दोषी ठहराए गए दो अस्पताल एक माह बाद भी बेधड़क चल रहे हैं। इनमें से एक ठाकुरगंज स्थित ऑक्सीजन व दूसरा कुर्सी रोड का आव्या हॉस्पिटल है। सीएमओ का कहना है कि दोनों अस्पतालों के संचालन पर रोक लगाने के लिए विधिक दिशानिर्देश लिए जा रहे हैं।
ठाकुरगंज के मुफ्तीगंज निवासी जियान (03) की ऑक्सीजन हॉस्पिटल में 21 जुलाई को मौत हो गई थी। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और वसूली का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। अपर निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने जांच की। नोटिस जारी करके डॉक्टर को बयान दर्ज करने के लिए बुलाया, जो बीमारी का बहाना बताकर गायब हो गया। दो महीने इंतजार के बाद अपर निदेशक ने सीएमओ को पत्र भेजकर कार्रवाई के निर्देश दिए।
सीएमओ ऑफिस से कई पत्र जारी हुए, लेकिन डॉक्टर और अस्पताल संचालक साक्ष्य के साथ कमेटी के सामने पेश नहीं हुए। दिसंबर में जारी जांच रिपोर्ट में अस्पताल को दोषी करार दिया था। कमेटी के सदस्यों का कहना है बच्चे का इलाज कुशल विशेषज्ञ ने नहीं किया था। इलाज में लापरवाही से उसकी जान गई। सीएमओ ने अभी तक पुलिस को पत्र नहीं भेजा है। अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करके संचालन पर रोक नहीं लगाई जा सकी है।
ऑपरेशन के बाद भी नहीं मिली राहत
सीतापुर निवासी धर्मेद्र चौहान ने बीते साल जनवरी में कुर्सी रोड स्थित आव्या हॉस्पिटल में दिखाया था। डॉक्टर ने हाथ में तार डालकर उंगलियां सीधी करने की बात कही थी। ऑपरेशन के 35 हजार रुपये भी वसूल लिए। इसके बाद भी मरीज को राहत नहीं मिली। उसने सीएमओ ऑफिस में शिकायत दर्ज कराई। सीएमओ की ओर से बनाई गई जांच कमेटी ने अस्पताल को दोषी ठहराया। हालांकि, इसके बाद भी अस्पताल पर नकेल नहीं कस सकी है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि कमेटी ने दोनों अस्पतालों को दोषी ठहराया है। इन पर कार्रवाई से पहले विधिक राय ली जा रही है, ताकि मामला कोर्ट में न फंसे। दोनों अस्पतालों पर जल्द कार्रवाई होगी।