नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन ने मंगलवार को अधिकारियों को आदेश दिए कि वे माइक्रो कन्टेनमेंट जोन पर विशेष नजर रखें और निगरानी समितियों को ज्यादा क्रियाशील किया जाए। नगर विकास मंत्री कोविड-19 परिप्रेक्ष्य में प्रदेश के 11 मंडलों की 81 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष व आधिशासी अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि माइक्रो कन्टेनमेंट जोन में योजनाबद्ध तरीके से सैनिटाइजेशन करवाया जाए।
आशुतोष टंडन ने कहा कि कन्टेनमेंट जोन व वीकेंड लॉकडाउन में बड़े पैमाने पर सैनिटाइजेशन सुनिश्चित करवाया जाए। फ्रंट लाइन वर्करों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उनका वैक्सीनेशन करवाया जाए और समय-समय पर कोविड टेस्ट हों। कर्मचारियों को पीपीई किट काम के दौरान उपलब्ध करवाई जाए और सभी कर्मचारियों को समय से वेतन दिए जाएं। अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि सभी शहरी निकायों ने 4813 टीमें गठित करके 1,83,344 स्थलों पर व्यापक सैनिटाइजेशन करवाया।
प्रवासियों पर रखें नजर
नगर विकास मंत्री ने निगरानी समितियों को ज्यादा एक्टिव करने को कहा है। उन्होंने कहा कि निगरानी समितियों को लोगों को जागरूक करना चाहिए। निगरानी समिति का अध्यक्ष पार्षदों को बनाया गया है ताकि वे अपने क्षेत्र की अच्छी तरह से निगरानी कर पाएं। मंत्री ने कहा कि प्रवासियों पर भी नजर रखी जाए ताकि उनकी ट्रेसिंग और टेस्टिंग हो सके। मंत्री ने कहा कि पालिका परिषदों में भी वॉर्ड के स्तर पर निगरानी समितियां बनाई जाएं। मंत्री ने हर वॉर्ड में सघन सैनिटाइजेशन करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कन्टेनमेंट जोन सुबह-शाम सैनिटाइज किए जाएं। शाम को व रात में प्रमुख बाजारों को सैनिटाइज किया जाए।
1,04,639 फ्रंट लाइन वर्कर्स का हुआ टीकाकरण
अधिकारियों ने जानकारी दी कि कोविड-19 के संक्रमण से बचाव में काम कर रहे 1,29,702 फ्रंट लाइन वर्कर्स का ऑनलाइन पंजीकरण करवाया गया है। इसके सापेक्ष पहले व दूसरे चरण में 1,04,639 फ्रंट लाइन वर्कर्स का टीकाकरण करवाया जा चुका है। प्रदेश में कुल 27281 कन्टेनमेंट जोन बनाए गए हैं। स्थानीय निकायों (नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों एवं नगर पंचायतों) में कुल 12,016 निगरानी समितियां गठित की गई, जिनमें कुल 58,368 सदस्य हैं। मंत्री ने बरसात से पहले ही डीसिल्टिंग करवाने और गर्मियों के लिए पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त करने आदेश दिए हैं।