लखनऊ। सूरजमुखी, अलसी, कद्दू और तिल जैसे बीज प्राकृतिक ऊर्जा व पोषक तत्वों के स्रोत माने जाते हैं। हाल ही में महिलाओं में मासिक धर्म की नियमितता व स्वास्थ्य लाभों के लिए इनका सेवन बढ़ा है। एसजीपीजीआई की वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ शिल्पी त्रिपाठी ने इस चलन पर राय दी है।
डॉ. शिल्पी त्रिपाठी का कहना है कि मासिक चक्र के अलग-अलग चरणों में बीज खाने का तरीका प्रचलित है। बीजों में ओमेगा-3, फैटी एसिड्स, प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे पोषक तत्व होते हैं। ये संतुलित आहार का हिस्सा बनकर स्वास्थ्य में योगदान देते हैं। हालांकि, मासिक धर्म समस्याओं में सिर्फ बीजों के सेवन से लाभ के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं। इन्हें हार्मोन ठीक करने वाले खाद्य के बजाय संतुलित आहार का छोटा हिस्सा मानें। महिलाओं को भोजन में साबुत अनाज, दालें, दूध, दही, हरी सब्जियां, फल, स्वस्थ वसा और पर्याप्त पानी शामिल करना चाहिए।
इतनी मात्रा में लें बीज
डॉ. शिल्पी के मुताबिक, एक स्वस्थ महिला के लिए प्रतिदिन 5-10 ग्राम बीज पर्याप्त हैं। इसे बढ़ाकर 15-20 ग्राम तक किया जा सकता है। महीने के पहले दिन से 14वें दिन तक अलसी और कद्दू के बीज और 15वें दिन से 28वें दिन तक तिल और सूरजमुखी के बीज खाने चाहिए।
ये हो सकती हैं समस्याएं
बीजों को अधिक मात्रा में या गलत तरीके से खाने से गैस, पेट फूलना, भारीपन, ऐंठन, कब्ज, दस्त, एलर्जी और अधिक कैलोरी से वजन बढ़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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बीज अच्छी डायट का हिस्सा हैं पर इलाज का विकल्प नहीं। मासिक धर्म से जुड़ी समस्याएं कई चीजों पर निर्भर करती हैं। इसलिए बीजों के सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
- डॉ. शिल्पी त्रिपाठी, वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ, एसजीपीजीआई