लखनऊ। केजीएमयू में संविदा नर्स की लापरवाही से मासूम की जान चली गई। गलत इंजेक्शन लगाने से बच्चे की सांस थमी। पीड़ित परिवार की शिकायत पर केजीएमयू प्रशासन ने मामले की जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए गए। अब जांच कमेटी की सिफारिश पर आरोपी नर्स की सेवा समाप्त कर दी गई है। उसका नर्सिंग काउंसिल में पंजीकरण भी रद्द करने की सिफारिश की गई है।
हड्डी से जुड़ी गंभीर बीमारी से पीड़ित 12 वर्षीय मासूम सेजल वर्मा को परिजनों ने कई डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन फायदा नहीं हुआ था। थकहार कर परिजन बच्चे को लेकर केजीएमयू पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने बच्चे की जांच कराई, जिसमें फीमोरल डेफिशिएंसी की पुष्टि हुई। इस बीमारी में जांघ की हड्डी का ऊपरी हिस्सा जन्म से अविकसित होता है। डॉक्टरों ने बच्चे को भर्ती कर इलाज शुरू किया। परिजनों का आरोप था कि बच्चे को नर्स ने गलत इंजेक्शन लगा दिया, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई थी। उसे तुरंत आईसीयू-वेंटिलेटर पर भर्ती किया गया। 24 दिसंबर को इलाज के दौरान बच्चे की मृत्यु हो गई। शिकायत पर केजीएमयू प्रशासन ने जांच कराई। सीएमएस डॉ. बीके ओझा की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी गठित की गई। जांच में संविदा नर्स की गलती उजागर हुई। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि सुबूत और बयान के आधार पर कमेटी ने संविदा नर्सिंग स्टाफ को दोषी पाया। उसकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं।