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नृत्यगोपाल ने दी थी मंदिर आंदोलन को दिशा, किया निर्माण में सहयोग का आह्वान

Thu, 20 Feb 2020 03:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा धीरेंद्र सिंह, अयोध्या
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महंत नृत्य गोपालदास - फोटो : अमर उजाला
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कान्हा की नगरी मथुरा से बाल्यकाल में रामनगरी आए नृत्यगोपाल दास कृष्ण व राम भक्ति के अनुपम उदाहरण हैं। वह दोनों नगरी में भक्ति व अनुराग के प्रमुख संत के साथ श्रीराम जन्मभूमि के साथ  श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के भी अध्यक्ष हैं।

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 छह दिसंबर की घटना से लेकर इसके पहले व बाद के तमाम संघर्षों में महंत नृत्यगोपाल दास कांग्रेस, सपा-बसपा सरकारों में तरह-तरह के उत्पीड़न भी झेलने पड़े। लेकिन उनकी भक्ति व समर्पण का प्रतिफल रहा कि बुधवार को उन्हें सर्वसम्मति से श्रीराम जन्मभूमि क्षेत्र ट्रस्ट का अध्यक्ष ुचना गया है। राममंदिर आंदोलन में जिन प्रमुख संतों ने अयोध्या में कोर्ट से लेकर सड़क तक संघर्ष किया था, उनमें दिगंबर अखाड़ा के महंत परमहंस रामचंद्र दास के बाद मणिरामदास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास हैं।

 जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी शिवरामाचार्य जी महाराज के द्वारा श्रीराम जन्मभूमि न्यास की स्थापना हुई। जब परमहंस रामचंद्र दास ने ‘8 मार्च 1986 तक श्रीराम जन्मभूमि का ताला नहीं खुला तो मैं आत्मदाह करूंगा’ की घोषणा करके सनसनी फैला दी तो नृत्यगोपाल आंदोलन के प्रमुख कर्ता-धर्ता थे। परिणाम यह हुआ कि 1 फरवरी 1986 को ही ताला खुल गया। 
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जनवरी, 1989 में प्रयाग महाकुम्भ के अवसर पर आयोजित तृतीय धर्मसंसद में शिला पूजन एवं शिलान्यास में अहम भूमिका निभाई। 1989 में परमहंस को श्रीराम जन्मभूमि न्यास का कार्याध्यक्ष घोषित किया गया। तब नृत्यगोपाल दास उपाध्यक्ष बने। परमहंस की दृढ़ संकल्प शक्ति के परिणामस्वरूप ही निश्चित तिथि, स्थान एवं पूर्व निर्धारित शुभ मुहूर्त 9 नवम्बर 1989 को शिलान्यास कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

अक्तूबर 1982 में दिल्ली की धर्म संसद में 6 दिसंबर की कारसेवा के निर्णय में मुख्य भूमिका निभाई। स्वयं अपनी आंखों से उस ढांचे को बिखरते हुए देखा था, जिसका स्वप्न वह अनेक वर्षों से अपने मन में संजोए थे। नृत्यगोपाल दास की अगुआई में ही राममंदिर के लिए पत्थर तराशी तेज हुई, मंदिर मॉडल में लगने वाले दो लाख घनफुट पत्थर में सवा लाख घनफुट पत्थर तराशे जा चुके हैं। न्यास के पास करोड़ों की भूमि समेत नकदी भी है।

बरसाना मथुरा के कहौला में जन्मे हैं नृत्यगोपाल
रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास का जन्म 11 जून 1938 को बरसाना मथुरा के कहौला ग्राम में हुआ था। उन्होंनें 12 वर्ष की उम्र में ही वैराग्य धारण कर लिया और अयोध्या आ गए। शिष्य राधेश्याम शास्त्री बताते हैं कि इसके बाद वह अयोध्या से काशी में संस्कृत की पढ़ाई करने गए। पढ़ाई में बहुत निपुण थे, प्रत्येक कक्षाओं में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके बाद 1953 में पुन: अयोध्या आकर मणिरामदास की छावनी में रुके। वह महंत राममनोहर दास से दीक्षित थे। नृत्यगोपाल दास दशकों तक राम मंदिर आंदोलन के संरक्षक की भूमिका में रहे हैं।
 

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महंत नृत्यगोपाल दास ने राम मंदिर निर्माण में सहयोग का किया आह्वान

श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष बनाए गए महंत नृत्य गोपाल दास मंगलवार को देर शाम से बुधवार सुबह दस बजे तक वृंदावन स्थित अपने नारायण आश्रम में रहे। बताया जाता है कि यहां कई संतों से महंत की चर्चा हुई, जिनमें उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में सहयोग का आह्वान किया है। बुधवार सुबह उन्हें दिल्ली पहुंचने की जानकारी मिली तो वह तत्काल रवाना हो गए। 

महंत नृत्यगोपाल दास का वृंदावन में केशवधाम के निकट नारायण आश्रम है। राम मंदिर आंदोलन के दौरान महंत ने काफी गतिविधियां मथुरा-वृंदावन में रहकर जारी रखीं। लोकसभा में राम मदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाए जाने की घोषणा के बाद से ही देशभर में संतों ने महंत नृत्य गोपाल दास को ट्रस्ट में शामिल करने की मांग शुरू कर दी थी। वृंदावन में भी संतों ने मांग की थी। आचार्य देवमुरारी बापू ने बताया कि उन्होंने महंत से उनके आश्रम में भेंट की। 
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