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अब राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में मिली गड़बड़ी, दबाई घपले की फाइल  

Wed, 09 Sep 2020 01:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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जनपद बलरामपुर में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के ऑडिट में दो साल पहले पकड़े गए घपले में कार्रवाई के बजाय अधिकारियों ने पूरी फाइल ही दबा दी, जबकि, समाज कल्याण निदेशालय ने जिले के अफसरों से दस्तावेजों का सत्यापन कर रिपोर्ट देने के लिए कहा था। तब से आज तक न तो रिपोर्ट ही दी गई और न ही मामले में कोई कार्रवाई की गई। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि अगर इस मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए, तो बड़े घपले का खुलासा हो सकता है। 

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वर्ष 2018 में बलरामपुर में योजना का ऑडिट कराया गया तो गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। पता चला एक ही वित्त वर्ष में विकासखंड हरैया सतघरवा की एक ही ग्राम पंचायत हरैया में 28 मृतकों के आश्रितों को योजना का लाभ दिया गया। आवेदन पत्रों के साथ संलग्न मृत्यु प्रमाण पत्र और परिवार रजिस्टर की नकल में एक ही ग्राम पंचायत अधिकारी के अलग-अलग हस्ताक्षर मिलना शक का आधार बन गया।

इस मामले में समाज कल्याण निदेशालय ने 3 अगस्त 2018 को बलरामपुर के जिला प्रशासन को संबंधित ग्राम पंचायत में मुखिया की मृत्यु की तारीख, निवास की स्थिति प्रमाणित कराने और मृत्यु रजिस्टर के 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक के पन्नों की  प्रमाणित छायाप्रति देने के लिए लिखा गया। इस पत्र का आज तक न तो जवाब भेजा गया और न ही किसी तरह की कोई कार्रवाई की गई। 
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अमर उजाला ने मामले की छानबीन की तो बलरामपुर के जिला समाज कल्याण अधिकारी एमपी सिंह ने बताया कि प्रकरण उनके यहां चार्ज लेने से पहले का है। मामला देख रहा बाबू रिटायर हो चुका है और संबंधित बाबू को चार्ज भी नहीं दिया है। इसलिए संबंधित फाइल तो नहीं मिली, लेकिन इस दौरान उपलब्ध कराए गए पत्र के आधार पर जांच के लिए जिला प्रशासन से फिर अनुरोध किया गया है।

सूत्रों की माने तो राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में यह घपला सिर्फ बलरामपुर तक ही सीमित नहीं है। बताते हैं कि पिछले वित्त वर्ष में चित्रकूट में 65 साल और 85 साल के बुजुर्गों की मृत्यु होने पर आश्रितों को योजना का लाभ दिया गया। 

दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करके इन गड़बड़ियों को अंजाम दिया गया। अब इस मामले में संयुक्त निदेशक, समाज कल्याण अरुण कुमार पांडे ने दोनों प्रकरणों में जांच के आदेश दे दिए हैं। इससे पहले वर्ष 2017-18 में लखनऊ में भी इस योजना के 40 से अधिक ऐसे लाभार्थी पकड़े गए थे, जो इस जिले के रहने वाले ही नहीं थे। विभाग के ही कुछ लोगों की मिलीभगत से धनराशि हड़पने की साजिश रची गई थी, लेकिन सत्यापन होने के कारण सफल नहीं हो सकी।  

यह है योजना

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में परिवार के कमाऊ मुखिया का निधन होने पर आश्रितों को एकमुश्त 30 हजार रुपये देने का प्रावधान है। बशर्ते, परिवार गरीबी रेखा से नीचे हो और मुखिया की उम्र 18 साल से अधिक और 60 वर्ष से कम हो। 

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