अयोध्या। आने वाले समय में जिले के 488 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन सौर ऊर्जा से जगमग करेंगे। इन सभी भवनों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे बिजली आपूर्ति पर इनकी निर्भरता खत्म हो जाएगी। इसी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत अयोध्या में कार्बन न्यूट्रल 58 ग्राम पंचायत विकसित किए जाने की तैयारी है।
रामनगरी में मौजूदा समय में आंगनबाड़ी केंद्रों में परंपरागत माध्यम से बिजली आपूर्ति की व्यवस्था है। ऐसे में कई केंद्रों के भवनों का बिजली बिल भी बकाया हो जाता है। बकाया बिजली बिल जमा करने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को मशक्कत करनी पड़ती है। इस परेशानी से मुक्ति दिलाने की दिशा में की गई पहल के तहत पहले चरण में ग्राम पंचायत भवनों को सौर ऊर्जा से प्रकाशमान करने के साथ अब आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भी यह व्यवस्था प्रभावी की जा रही है।
इसी कड़ी में जिले की 58 ग्राम पंचायतों को कार्बन न्यूट्रल गांव के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम शुरू हो गया है। इन गांवों में मियावाकी पद्धति से वैदिक वन पहले ही तैयार किए जा चुके हैं। अब यहां के ग्राम पंचायत भवनों को सौर ऊर्जा से लैस करने के बाद परिषदीय विद्यालयों को भी सोलर पैनल से आच्छादित किया जाएगा। इसके बाद क्रमबद्ध ढंग से अन्य सरकारी भवन भी सौर ऊर्जा से प्रकाशमान किए जाएंगे।
कार्बन न्यूट्रल ग्राम पंचायत वह गांव होता है जो नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर ऊर्जा) का उपयोग करके अपने कार्बन उत्सर्जन को संतुलित करता है। इससे शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त होता है। ऐसा करने के लिए ये पंचायतें ऊर्जा-कुशल समाधानों, सौर ऊर्जा संयंत्रों और अन्य हरित पहलों को अपनाती हैं। देश की पहली कार्बन-न्यूट्रल ग्राम पंचायत जम्मू के सांबा जिले का पल्ली गांव है, जो पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होता है।
मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि देश की पहली सोलर सिटी के रूप में विकसित अयोध्या में अब सोलर विलेज तैयार करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी प्रोजेक्ट की अगली कड़ी के रूप में कार्बन न्यूट्रल ग्राम पंचायत विकसित करने के लिए चरणबद्ध ढंग से काम किया जा रहा है। इसमें यूपी नेडा समेत अन्य विभागों का सहयोग लिया जा रहा है। ग्राम पंचायतों की भी जिम्मेदारी तय की गई है।