राजधानी में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, समाजसुधारक दीनदयाल उपाध्याय व श्यामा प्रसाद मुखर्जी को समर्पित राष्ट्र प्रेरणा स्थल अब एलडीए नहीं बनाएगा।
शासन ने एलडीए से इस प्रोजेक्ट को छीनकर अब पीडब्ल्यूडी को दिया है। पीडब्ल्यूडी ने निर्माण शुरू कराने के लिए साइट सर्वे का काम भी शुरू करा दिया है।
इस प्रोजेक्ट पर करीब 110 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। अब 50 करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी को ही कराने हैं।
मालूम हो कि वर्ष 2020 में राष्ट्र प्रेरणा स्थल प्रोजेक्ट एलडीए को दिया गया था। 2020 में प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद एलडीए ने आर्किटेक्ट सलाहकार के चयन की प्रक्रिया भी खुद ही पूरी की थी।
स्काईलाइन को सलाहकार के लिए चुना गया, जिसका काम डिजाइन और डीपीआर तैयार करना था। एलडीए अभी इसी काम को करा रहा था।
इस बीच अब शासन के आदेश पर प्रोजेक्ट को पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर कर दिया गया है। एलडीए ने प्रोजेक्ट पर काम करना भी बंद कर दिया है।
एलडीए अब राष्ट्र प्रेरणा स्थल के पास ही मौजूद नदी और बंधा के बीच की जमीन पर सिर्फ सिटी फॉरेस्ट के विकास का काम करेगा।
...तो क्या पुराने दाग पड़ गए भारी
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निर्माण शासन की प्राथमिकता पर है। ऐसे में शासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता है। इससे पहले एलडीए ने शासन के तीन प्रोजेक्टों पर काम किया है। जनेश्वर मिश्र पार्क, जेपीएनआईसी और हुसैनाबाद क्षेत्र का सौंदर्यीकरण। इनका काम वर्तमान में अधूरा है। इसकी जानकारी शासन को भी है। ऐसे में राष्ट्र प्रेरणा स्थल विकसित करने का काम पीडब्ल्यूडी को मिल गया।
जवाब, 50 करोड़ से अधिक का प्रोजेक्ट
एलडीए के अधिकारियों का कहना है कि शासन की नीति के मुताबिक 50 करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्य अब पीडब्ल्यूडी को करना है। राष्ट्र प्रेरणा स्थल का बजट इससे अधिक हो रहा है। केवल सिविल वर्क और लैंडस्केपिंग का बजट ही 82 करोड़ रुपये है। वहीं मूर्तियां लगाने के लिए संस्कृति विभाग को अलग से बजट मिलेगा। इनका खर्च भी 25 करोड़ रुपये से अधिक आंका जा रहा है।
पीडब्ल्यूडी को दिया गया काम
एलडीए अब राष्ट्र प्रेरणा स्थल के विकास का कार्य नहीं करेगा। यह काम पीडब्ल्यूडी को दिया गया है। एलडीए से जो भी संभव मदद होगी। वह पीडब्ल्यूडी को की जाएगी।
- पवन गंगवार, सचिव, एलडीए
सीएम कार्यालय ने पूर्णता प्रमाण पत्र में लापरवाही पर मांगी रिपोर्ट
पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं होने से अवैध निर्माणों की बढ़ रही संख्या पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने जवाब मांगा है। वहीं एलडीए वीसी को पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं होने की स्थिति में जरूरी कार्रवाई के लिए निर्देश भी दिया गया है। ‘अमर उजाला’ ने नौ जुलाई 2021 को ‘पूर्णता प्रमाणपत्र में लापरवाही से बढ़ा अवैध निर्माण’ शीर्षक से इस मुद्दे को उठाया था। पूर्णता प्रमाण पत्र के लिए अनिवार्यता के बाद भी 98 फीसदी इमारतों में ऐसा नहीं किए जाने के बाद एलडीए ने जरूरी कार्रवाई भी नहीं की। इससे स्वीकृत मानचित्र के विरुद्ध निर्माण के अलावा सैटबैक कवर कर लिए जाने से बिल्डिंगों में असुरक्षा की स्थितियां भी बढ़ रही हैं। इस पर मुख्यमंत्री के ओएसडी आरएन सिंह ने जरूरी कार्रवाई के लिए निर्देश दिया है।