डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) अब 12वीं के बाद सीधे पीजी की डिग्री देगा। विश्वविद्यालय की संबद्धता समिति की बैठक में यह निर्णय किया गया। अब यदि छात्र 12वीं के बाद इंटीग्रेटेड एमसीए में दाखिला लेता है तो उसे सीधे पीजी स्तर की डिग्री मिलेगी।
इसी तरह एमएएम में सीधे मैनेजमेंट में पीजी की डिग्री दी जाएगी। पहले तीन साल में बीबीए या बीसीए और पांच साल में पीजी की डिग्री मिलती थी।
आगामी सत्र के लिए किसी भी कॉलेज को मास्टर ऑफ एप्लाइड मैनेजमेंट (एमएएम) या मास्टर ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए) डुअल डिग्री कोर्स की संबद्धता नहीं दी जाएगी। विश्वविद्यालय की मानें तो यह निर्णय ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) की गाइडलाइंस के अनुसार लिया गया है।
अब यदि कोई छात्र 12वीं के बाद इंटीग्रेटेड एमसीए में दाखिला लेता है तो उसे सीधे पीजी स्तर की डिग्री मिलेगी। इसी तरह एमएएम में सीधे मैनेजमेंट में पीजी की डिग्री दी जाएगी। पहले इन कोर्स में तीन साल में बीबीए या बीसीए और पांच साल में पीजी की डिग्री मिलती थी। चूंकि एआईसीटीई में बीबीए या बीसीए की डिग्री का प्रावधान नहीं है, इसलिए एकेटीयू संस्थाओं को इन कोर्स की संबद्धता नहीं देगा।
बायोडाटा में नहीं होगा स्नातक की डिग्री का नाम
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- फोटो : amar ujala
इस साल भी जिन छात्रों ने एसईई दिया है, उन्हें दाखिला लेने पर पांच साल की पढ़ाई के बाद सीधे पीजी की डिग्री मिलेगी। यानी उनके बायोडाटा में स्नातक की डिग्री का नाम ही नहीं होगा।
इसलिए बदली व्यवस्था
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता आशीष मिश्रा ने बताया कि अक्सर छात्र तीन साल की पढ़ाई के बाद एग्जिट करने की स्थिति में स्नातक स्तर पर बीबीए या बीसीए की डिग्री मांगते थे, जबकि एआईसीटीई में इसका प्रावधान नहीं है।
वहीं यूपीएसईई के समन्वयक प्रो. कैलाश नारायण ने बताया कि इस बार ब्रोशर में एमसीए डुअल डिग्री की जगह केवल एमसीए कोर्स लिखा गया है। इसी तरह एमएएम का नाम भी बदला गया है। काउंसलिंग से जो प्रवेश होंगे, उसमें वही छात्र लिए जाएंगे जो पांच साल का कोर्स करना चाहते हैं।
इस पर एकेटीयू के कुलपति विनय कुमार पाठक का कहना है कि एआईसीटीई ने एमएएम और एमसीए डुअल डिग्री प्रोग्राम खत्म कर दिया है, इसलिए हमने भी संबद्धता देना बंद करने का फैसला किया है। विद्यार्थियों को पांच साल का कोर्स करने पर ही डिग्री मिलेगी।