लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में सभागारों की बुकिंग के बाद दी जाने वाली भुगतान की रसीद अब अंग्रेजी में नहीं, बल्कि हिंदी में ही मिलने लगी है। अमर उजाला में 15 जनवरी को प्रकाशित खबर ‘ये तो हद हो गई : हिंदी संस्थान... और अंग्रेजी में काम’ पर एक दिन बाद ही संस्थान के निदेशक ने संज्ञान ले लिया था।
उन्होंने आदेश दिया था कि जल्द ही ये रसीदें अंग्रेजी की जगह हिंदी में दी जाएंगी। निदेशक राज बहादुर सिंह ने जानकारी दी कि रसीदें अब हिंदी में छपकर आ गई हैं और सभागारों की बुकिंग कराने वालों को यही दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आगे भी इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि संस्थान में सभी कामकाज हिंदी में ही हों।