केजीएमयू में आने वाले मरीजों को अब स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। इसके लिए ट्रॉमा सेंटर के गेट के बगल में काउंटर बनाया जा रहा है। इसी तरह मानसिक रोग विभाग में बने होल्डिंग एरिया को खत्म किया जाएगा और ट्रॉमा सेंटर का ग्राउंड फ्लोर होल्डिंग एरिया में तब्दील होगा। कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. बिपिन पुरी ने शनिवार को ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण कर 10 दिन में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का निर्देश दिया था।
राजधानी में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद सितंबर में मानसिक रोग विभाग में होल्डिंग एरिया बना दिया गया था। अब मरीजों की संख्या काफी कम हो गई है। ऐसे में कुलपति ने मानसिक रोग विभाग को खाली करने का आदेश दिया है। ताकि वहां सामान्य मरीजों का इलाज फिर से शुरू हो सके। अब होल्डिंग एरिया ट्रॉमा सेंटर परिसर में शिफ्ट किया जाएगा।
कुलपति ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर के सामने रैन बसेरा बना हुआ था। उसे पीछे की तरफ से खिसका दिया गया है। आगे खाली पड़ी जगह में काउंटर बनाए जा रहे हैं। वहां व्हीलचेयर और स्ट्रेचर रखने की भी जगह निकल गई है। ऐसे में ट्रॉमा सेंटर में आने वाले मरीजों को तत्काल गेट के सामने बने रिसेप्शन से व्हीलचेयर और स्ट्रेचर मिल जाएगा।
निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवाल
ट्रॉमा सेंटर के मुख्य गेट के सामने चल रहे निर्माण कार्य में घटिया ईंट के इस्तेमाल का आरोप लग रहा है। निर्माण विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह ईंट कम पकी हुई (लालपेटी) और बारिश के दिन में छींटे पड़ने की वजह से द्वितीय श्रेणी के तहत अलग की गई है। इस ईंट को पक्के निर्माण कार्य के लिए अनुपयोगी माना जाता है। इस संबंध में केजीएमयू के इंजीनियर रामविलास का कहना है कि वह सोमवार को मौका मुआयना करेंगे। ईंट की गुणवता खराब होगी तो उसे बदलवाया जाएगा।