आक्सफोर्ड पार्शियल घुटना प्रत्यारोपण को बटन सर्जरी भी कहते हैं। घुटने के तीन हिस्से होते हैं। पहले किसी भी हिस्से में अर्थराइटिस होने पर पूरा घुटना बदला जाता था। लेकिन अब इस तकनीक में जिस हिस्से में अर्थराइटिस होता है अथवा जो हिस्सा किसी कारणवश क्षतिग्रस्त होता है उसे ही प्रत्यारोपित करते हैं। यह करीब 20 फीसदी सस्ता है। चीरा कम लगता है। करीब 30 से 40 मिनट सर्जन का समय बचता है। संक्रमण का खतरा कम रहता है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज सभी क्रियाएं कर सकता है।
- प्रो, आशीष कुमार, आयोजन सचिव
इस तकनीक की क्या है खास- खास
- पूरे घुटने के बजाय सिर्फ एक हिस्से को बदलते हैं।
- जरूरत पड़ने पर दूसरे हिस्से को बदलने का मौका रहता है
- जिनका लिगामेंट ठीक हो उनकेलिए यह तकनीक ज्यादा फायदेमंद है।
- घुटना बदलवाने वाले मरीजों में करीब 40 फीसदी में इस तकनीक का प्रयोग किया जा सकता है।
- खर्च कम है। चीरा कम लगता है।
ट्रेनिंग इंजरी की वजह से सैनिकों में घुटने की समस्या के केस ज्यादा आते हैं। ऐसे में इस तकनीक से उन्हें लाभ मिलेगा। क्योंकि पूरा घुटना खोल देने के बाद विकल्प खत्म हो जाते हैं। इस त कनीक के जरिए जितना हिस्सा प्रभावित है, उसे बदल देते हैं। बाकि 15 से 20 साल बाद बदला जाता है। इससे घुटने का लाइफ बढ़ जाती है।
- डा. विकास कुलश्रेष्ठ, आर्मी हास्पिटल, चंडीगढ़
साइकिल चलाएं, घुटना बचाएं
घुटने में तकलीफ हो तो सीढ़ी से उतरना बंद देना चाहिए। अल्थी- पल्थी मारकर बैठना नुकसानदेह होता है। घुटने को बचाने के लिए वजन कम करें। घुटने की उम्र बढ़ाने के लिए साइकिल चलाना सबसे फायदेमंद है। यदि किसी कारणवश हल्की चोट लग जाए और लंबे समय तक दर्द बना रहे तो चिकित्सक से संपर्क करें। शुरुआती दौर में दवाओं के जरिए भी इसे ठीक किया जा सकता है।
- प्रो संतोष कुमार, केजीएमयू