हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत अगर कोई नाबालिग लड़की शादी कर लेती है तो उसकी शादी को शून्य होना नहीं कहा जा सकता है। यानी उसकी शादी भी मान्य होगी। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस अहम विधि व्यवस्था के साथ मर्जी से विवाह करने वाली लड़की को उसके पति के साथ जाने देने के लिए स्थानीय राजकीय महिला शरणालय को तुरंत रिलीव करने के निर्देश दिए।
न्यायमूर्ति अजय लांबा और न्यायमूर्ति अशोक पाल सिंह की खंडपीठ ने यह अहम नजीर वाला फैसला महिला शरणालय में रह रही लड़की की रिट पर दिया। याची लड़की ने अपने कथित पति के जरिये यह याचिका दायर कर महिला शरणालय से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया था ताकि वह अपने पति के साथ रह सके।
लड़की का कहना था कि उसने अपनी मर्जी से युवक के साथ शादी की है। जबकि उसके पिता और भाई 50 हजार रुपये लेकर उसकी शादी उससे उम्र में काफी बड़े एक व्यक्ति से करवाना चाहते थे। इसलिए उसके पिता और भाई उसकी मर्जी से हुई शादी का विरोध कर रहे हैं।