मेट्रो कानून के दायरे में अब पूरी राजधानी और बाराबंकी के तीन ब्लॉकों की 3100 वर्ग किलोमीटर की सीमा शामिल हो गई है।
लखनऊ मेट्रो सेल के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने बताया कि लखनऊ महानगरीय
क्षेत्र में मेट्रो रेल के निर्माण, संचालन एवं अनुरक्षण को कानूनी जामा
पहना दिया गया है।
निर्माण शुरू कराने, कॉरिडोर में निर्माण फ्रीज कराने, भूमि अधिग्रहण, पब्लिक यूटीलिटी ट्रांसफर, निर्माणों के लिए एनओसी जारी करने जैसे तमाम हक प्रदेश सरकार के माध्यम से फिलहाल मेट्रो सेल को और इसके बाद लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) को मिल जाएंगे।
इसके लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने मेट्रो रेल (कंसट्रक्शन ऑफ वर्क्स) अधिनियम 1978 और मेट्रो रेल ऑपरेशन एवं मेंटीनेंस अधिनियम 2002 के प्रावधानों को लखनऊ महानगर क्षेत्र में लागू कर दिया है।
इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या एसओ 02673 (ई) पांच सितंबर को जारी की गई थी।
कहां-कहां लागू होगा मेट्रो कानून
- मेट्रो कानून पूरे नगर निगम क्षेत्र, छावनी परिषद क्षेत्र, एलडीए एरिया और जिला पंचायत क्षेत्र में लागू होगा।
- राजधानी की सीमा के बाहर बाराबंकी के देवां, बंकी और निंदुरवा ब्लॉक की सीमाओं में भी मेट्रो एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
- इन सारे इलाकों का क्षेत्रफल करीब 3100 वर्ग किलोमीटर होगा, जिनमें यह कानून लागू हो गया है।
कानून लागू होने से असर
- मेट्रो के लिए निर्माण करने का विधिक अधिकार सरकार को मिल गया।
- इस कानून के तहत रास्ते में आने वाली भूमि को अर्जित किया जाएगा।
- मेट्रो कॉरिडोर के मध्य से 30-30 मीटर दोनों ओर निर्माण फ्रीज करने का हक मिला।
- मेट्रो कॉरिडोर के मध्य से 30-30 मीटर दोनों ओर निर्माणों के लिए एनओसी देने का हक मिला।
- मेट्रो निर्माण और संचालन के लिए नए नियम बनाने का अधिकार।