यूरोप से दक्षिण भारत में आई लफोरा बीमारी अब उत्तर भारत में भी खतरा पैदा कर रही है। अब तक देश में सैकड़ों जान निगल चुकी यह बीमारी इलाज उपलब्ध न होने के कारण खतरनाक हो चुकी है। ब्रेन की कोशिकाओं के नष्ट होने की वजह से यह शुरूआती उम्र में ही मौत का कारण बन रही है।
बृहस्पतिवार को सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) में ‘सेल्युलर रिस्पॉन्स टु ड्रग्स’ विषय पर आयोजित 38वीं अखिल भारतीय कोशिका जीव विज्ञान कांफ्रेंस में आईआईटी कानपुर के जीन साइंटिस्ट डॉ. एस गणेशन ने इसकी जानकारी दी।
उनका कहना था कि यह असल में न्यूरो डीजनरेटिव बीमारी है। इसमें ब्रेन में मौजूद न्यूरॉन्स तेजी से खत्म होते हैं। यह जन्मजात बीमारी है। इसके खतरनाक होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि केवल 20-25 साल की उम्र में मरीज की मौत हो जाती है।
अभी तक इसके मरीज दक्षिण भारत में ही मिले थे। इसका अभी तक कोई इलाज मौजूद नहीं है। कुछ मौजूद दवाओं से केवल न्यूरॉन्स को कुछ समय तक दुबारा पैदा या रिपेयर कर मरीज की उम्र बढ़ाई जा सकती है।